Ҳазор шукр ки сармастам аз шароби таҳур

هزار شکر که سرمستم از شراب طهور

Барӣаст шишаам аз хора ва майам аз ангур

بری است شیشه ام از خاره و می ام از انگور

Расост мастӣам аз ҷоми ҳиммати саршор

رساست مستی ام از جام همت سرشار

Сазост соғарам аз косаи сари фағфур

سزاست ساغرم از کاسهٔ سر فغفور

зи сангсори ғам аз устихони судаи танам

ز سنگسار غم از استخوان سوده تنم

Ба захмҳои даруни бастаи марҳами кофур

به زخمهای درون بسته مرهم کافور

Чаҳ дил наҳй ба ғами рӯзгори шармати бод

چه دل نهی به غم روزگار شرمت باد

Ки аз ту хона андӯҳ шуд сарои сарвар

که از تو خانه اندوه شد سرای سرور

Машав ба водии зулмати сарой тан хурсанд

مشو به وادی ظلمت سرای تن خرسند

Туро ки дар каф дил додаанд шамъи шуъӯр

ترا که در کف دل داده اند شمع شعور

Ба сурху зарди ҷаҳон дил манеҳ ки пайваста

به سرخ و زرد جهان دل منه که پیوسته

Мизоҷи мард нФўраст аз матоъи ғурур

مزاج مرد نفور است از متاع غرور

Сарвари хотират аз осмони умеди мадор

سرور خاطرت از آسمان امید مدار

Змҳрбонии ту хотирӣ нашуд масрур

زمهربانی تو خاطری نشد مسرور

Чу дастгири заъифоне аз балои мҳрос

چو دستگیر ضعیفانی از بلا مهراس

Басаст пардаи уфт ба хирман аз пари мӯр

بس است پردهٔ افت به خرمن از پر مور

Турои зи паҳлавии худ гар расад газанд сазост

ترا ز پهلوی خود گر رسد گزند سزاست

Дилати зҷўш ҳавас гашта хонаи занбӯр

دلت زجوش هوس گشته خانهٔ زنبور

зи рози синаи длмрдгон шудани огоҳ

ز راز سینهٔ دلمردگان شدن آگاه

Буд ба дидаи аҳли тамизи кашфи қубӯр

بود به دیدهٔ اهل تمیز کشف قبور

Агар чаҳ пои дилами судаи гашт то зону

اگر چه پای دلم سوده گشت تا زانو

Вале ба рафтан аз худ ндормши маъзӯр

ولی به رفتن از خود ندارمش معذور

Ту чун ба каъба рафтани зи хеши раҳи барадӣ

تو چون به کعبهٔ رفتن ز خویش ره بردی

Ба ҳайратам ки дигар омадан ба худ чаҳ зарур

به حیرتم که دگر آمدن به خود چه ضرور

зи дарди ишқи туами доғи ҳрзи бозуии дил

ز درد عشق توام داغ حرز بازوی دل

зи файзи ёди ту ғам дар ҳарими синаи сарвар

ز فیض یاد تو غم در حریم سینه سرور

Биёи Марв ки дил ғам кашида мо ро

بیا مرو که دل غم کشیدهٔ ما را

Буд з омадан ва рафтан ту мотаму сур

بود ز آمدن و رفتن تو ماتم و سور

Ба ҳар хароба ки сарви ту дар хиром ояд

به هر خرابه که سرو تو در خرام آید

Шавад зи хонаи чашми назорагии маъмур

شود ز خانهٔ چشم نظارگی معمور

Ба зӯри гиря , дили ёрро ба дарди орм

به زور گریه، دل یار را به درد آرم

Ки оби ҷо ба дил санг мекунад ба мурӯр

که آب جا به دل سنگ می کند به مرور

Кадоми шаб ки на аз ҷазб нашутур мижа аш

کدام شب که نه از جذب نشتر مژه اش

Рагами зи пӯсти буруни ҷуста чун раги тнбўр

رگم ز پوست برون جسته چون رگ طنبور

Рахти зи паҳлавӣ зулфаст пар ба дили наздик

رخت ز پهلوی زلف است پر به دل نزدیک

Ки пеши пои намояди шабонгаҳи оташи давр

که پیش پای نماید شبانگه آتش دور

Ба ранги ҷавҳари ойина аз руху зулфаш

به رنگ جوهر آئینه از رخ و زلفش

Ба печу тоби асирами миёни зулмату нур

به پیچ و تاب اسیرم میان ظلمت و نور

зи гардани ту айёраст хӯни ноҳақи халқ

ز گردن تو عیار است خون ناحق خلق

Ба ранги бодаи лаъл аз суроҳеи булӯр

به رنگ بادهٔ لعل از صراحی بلور

Баради зи як гули рухсори сад гулистони файз

برد ز یک گل رخسار صد گلستان فیض

Кунад насими нигаҳ бар гули рахт чу убӯр

کند نسیم نگه بر گل رخت چو عبور

Чаҳ ҳикматаст ки наздик мешавад бо дил

چه حکمت است که نزدیک می شود با دل

Буд мизоҷи ту чндонкаҳ аз муруввати давр

بود مزاج تو چندانکه از مروت دور

Туро касе ки дар оғӯш хеш гирад танг

ترا کسی که در آغوش خویش گیرد تنگ

Буд чу кисвати фонӯси грдоўри нур

بود چو کسوت فانوس گردآور نور

СФидбхтии ушшоқ сӯратӣ дорад

سفیدبختی عشاق صورتی دارد

Агар з тирагӣ ояд буруни шаби диҷўр

اگر ز تیرگی آید برون شب دیجور

Гиреҳи зи риштаи тақдир аз натавон кард

گره ز رشتهٔ تقدیر از نتوان کرد

Шавад кафати ҳамаи як нохун ар чу сами сутур

شود کفت همه یک ناخن ار چو سم ستور

Қумош халъат ҳастӣаст инки май нигарӣ

قماش خلعت هستی است اینکه می نگری

Чу тору пуди баҳами дршдаҳи синӣну шҳўр

چو تار و پود بهم درشده سنین و شهور

зи файзи ботил девонагон машав ғофил

ز فیض باطل دیوانگان مشو غافل

Каз оташи дили мо равшанаст шамъи шуъӯр

کز آتش دل ما روشن است شمع شعور

Агарчӣ серума шуд ӯ ман ғубор роҳ шудам

اگرچه سرمه شد او من غبار راه شدم

Сазад ки ҷӯш занад хӯни рашк аз раги тавр

سزد که جوش زند خون رشک از رگ طور

Нашуд зи меҳри бмои нарм шона гардад ёр

نشد ز مهر بما نرم شانه گردد یار

Кашидаам бабраш чун камон ҳамеша ба зӯр

کشیده ام ببرش چون کمان همیشه به زور

Хушо дилӣ ки ба арбоб дард ме ҷӯшад

خوشا دلی که به ارباب درد می جوشد

Мҷуи зи хотири масрури халқи файзи сарвар

مجو ز خاطر مسرور خلق فیض سرور

Ҳамеша боди гирифтори дард бе дардӣ

همیشه باد گرفتار درد بی دردی

Дилӣ ки нест зи бедоди офияти ранҷур

دلی که نیست ز بیداد عافیت رنجور

Ба рӯй хок нишин занг ғам наме бошад

به روی خاک نشین زنگ غم نمی باشد

Агар ту дидаи варӣ оинааст наъли сутур

اگر تو دیده وری آینه است نعل ستور

зи Асия чаҳ расад донаро ба ғайри шикаст

ز آسیا چه رسد دانه را به غیر شکست

Мадор аз фалак бе мадори чашми ҳузур

مدار از فلک بی مدار چشم حضور

Нишаста бар дилам аз баси зи чархи гирди малол

نشسته بر دلم از بس ز چرخ گرد ملال

Чу шамъи хилвати фонӯси рафтаи зинда ба гӯр

چو شمع خلوت فانوس رفته زنده به گور

Фалак ба қасди газандам ба собиту сайёр

فلک به قصد گزندم به ثابت و سیار

Кадоми шаб ки нашӯрида хонаи занбӯр

کدام شب که نشوریده خانهٔ زنبور

Гуҳи кинояи марои резаи хуонеи ағёр

گه کنایه مرا ریزه خوانی اغیار

Фишондаи сўнши алмос дар дили носур

فشانده سونش الماس در دل ناسور

Куҷои рӯм ба ки гӯям ки гаштааст дилам

کجا روم به که گویم که گشته است دلم

зи вазъи аҳли замони тангтар зи дидаи мӯр

ز وضع اهل زمان تنگتر ز دیدهٔ مور

Ҳазари зи маҳфили ёрони ин замонаи ҳазар

حذر ز محفل یاران این زمانه حذر

Ҳазари зи хонаи занбӯр яъне аз шару шӯр

حذر ز خانهٔ زنبور یعنی از شر و شور

Ҳамаи бадасту забон дар паии газанд ҳам анд

همه بدست و زبان در پی گزند هم اند

На дӯстӣ на нмкхўоргӣ буд манзур

نه دوستی نه نمکخوارگی بود منظور

Ҷудои зи ҳам чу шаванд ин ҷамоат аз ғит

جدا ز هم چو شوند این جماعت از غیت

Баҳам зананд зи дунболи неш чун занбӯр

بهم زنند ز دنبال نیش چون زنبور

зи ҳамгинони чунинам худо нигаҳдорд

ز همگنان چنینم خدا نگهدارد

Ки ҷумла дев сириштанд вази одамияти давр

که جمله دیو سرشتند وز آدمیت دور

Назар ба ботини шани ҳақ ба ҷониб ҳама аст

نظر به باطن شان حق به جانب همه است

Ки табъи шан буд аз икдгр ҳамеша нФўр

که طبع شان بود از یکدگر همیشه نفور

Шумо ки хуб тавонед шуд ба суҳбати хуб

شما که خوب توانید شد به صحبت خوب

зи ҳамнишинӣ ӯ бош бад шудан чаҳ зарур

ز همنشینی او باش بد شدن چه ضرور

Қисм ба сидқу сафои саҳар ки набӯд ва нест

قسم به صدق و صفای سحر که نبود و نیست

Ба ҷузи насиҳати азин гуфтугӯи марои манзур

به جز نصیحت ازین گفتگو مرا منظور

Хдогўаст ки ман хайрхоҳами аҳбобам

خداگو است که من خیرخواهم احبابم

Ба хотирами бадӣ ҳечкас накарда хутур

به خاطرم بدی هیچکس نکرده خطور

Маро ки дода худои мансаби схндонӣ

مرا که داده خدا منصب سخندانی

Ба ғайри мадҳи сроӣӣ чаро кунам мазкӯр

به غیر مدح سرائی چرا کنم مذکور

Дигар зи зикр ки шамъи забон маро афрӯхт

دگر ز ذکر که شمع زبان مرا افروخت

Ки таъна зан шуд азу бар саҳари шаби диҷўр

که طعنه زن شد ازو بر سحر شب دیجور

Насими лутфи хдиўии магари вазид казу

نسیم لطف خدیوی مگر وزید کزو

Шунида будӣ дами исавии дили ранҷур

شنیده بودی دم عیسوی دل رنجور

Шҳншҳӣ ки паии саҷда дараш ҳар шом

شهنشهی که پی سجدهٔ درش هر شام

Ниҳоди меҳри сари бандагӣ ба хок аз давр

نهاد مهر سر بندگی به خاک از دور

Шҳншҳӣ ки ба даргоҳи қадар ӯ фағфур

شهنشهی که به درگاه قدر او فغفور

зи сар ба хоки мазаллати ниҳоди тоҷи ғурур

ز سر به خاک مذلت نهاد تاج غرور

Шҳншҳӣ ки гиреҳҳои байзаи фӯлод

شهنشهی که گرههای بیضهٔ فولاد

Кушода мешавад аз ҳукм ӯ ба нохуни мӯр

گشاده می شود از حکم او به ناخن مور

Ба ранги ғунчаи забони лухти хӯн ба коҳиши бод

به رنگ غنچه زبان لخت خون به کاهش باد

Касе ки шуд ба лабаши ғайри ёълии мазкӯр

کسی که شد به لبش غیر یاعلی مذکور

зи бим шаҳна наҳй ту то ба субҳ нашӯр

ز بیم شحنهٔ نهی تو تا به صبح نشور

Ғунудаи духтари руз дар мшимаҳи ангур

غنوده دختر رز در مشیمهٔ انگور

Ба чашми субҳ ки ганҷури нақд хуршед аст

به چشم صبح که گنجور نقد خورشید است

Кашидаанд зи хок дар ту серумаи нур

کشیده اند ز خاک در تو سرمهٔ نور

Бадӯри шаҳнаи адл ту месазад ки кунад

بدور شحنهٔ عدل تو می سزد که کند

Чу муҳраи ҷои басари мори байзаи ъсФўр

چو مهره جا بسر مار بیضهٔ عصفور

Расад ба олами дили пайрават ба осонӣ

رسد به عالم دل پیروت به آسانی

Ки ганҷи махфии асрорро туе ганҷур

که گنج مخفی اسرار را تویی گنجور

СФидбхтии аъдои тираи ботини ту

سفیدبختی اعدای تیره باطن تو

Намӯнае буд аз пардаҳои дидаи кӯр

نمونه ای بود از پرده های دیدهٔ کور

Ба ҷанби рои ту бе нури дидаи хуршед

به جنب رای تو بی نور دیدهٔ خورشید

Ба пеши халқи ту сад хулди мӯътариф ба қусӯр

به پیش خلق تو صد خلد معترف به قصور

Ба ҷузи влои ту савму закот мҷзӣ нест

به جز ولای تو صوم و زکات مجزی نیست

Ба ғайри меҳр ту набӯд намозу ҳҳҷи манзур

به غیر مهر تو نبود نماز و ححج منظور

Мухолифи ту агар дар ҳирм каъба шавад

مخالف تو اگر در حیرم کعبه شود

Чунон буд ки ба девори дасти молади кӯр

چنان بود که به دیوار دست مالد کور

Ба реги баҳру биёбони муҳосибони қазо

به ریگ بحر و بیابان محاسبان قضا

Фазойил ту шимурданд ва монад номаҳсӯр

فضایل تو شمردند و ماند نامحصور

Ман фақири зи фазлат чаҳ метавонам гуфт

من فقیر ز فضلت چه می توانم گفت

Ба ғайр инки шавам мӯътариф ба аҷзу қусӯр

به غیر اینکه شوم معترف به عجز و قصور

Ки дод мадҳ сроӣит метавонад дод

که داد مدح سرائیت می تواند داد

зи домани сифатат кӯтаҳаст дасти шуъӯр

ز دامن صفتت کوته است دست شعور

зи ҳазрати ту илоҳӣ умед медорам

ز حضرت تو الهی امید میدارم

Ки субҳи рӯзи ҷазо бо вуҷӯди фисқу фуҷур

که صبح روز جزا با وجود فسق و فجور

Ба дӯзахам нафаристӣ ки дӯзах дигар аст

به دوزخم نفرستی که دوزخ دگر است

Маро ба душмани оли набӣ шудани маҳшур

مرا به دشمن آل نبی شدن محشور

зи шеър ва шоирем ӣнқадари натиҷа бас аст

ز شعر و شاعریم اینقدر نتیجه بس است

Ки дар замона ба маддоҳии туами машҳур

که در زمانه به مداحی توام مشهور

Басаст ҷоизаи назми ман ҳамин ҷӯё

بس است جایزهٔ نظم من همین جویا

Ки рӯз ҳашар шавам бо сегон ӯ маҳшур

که روز حشر شوم با سگان او محشور