Аз он ба чашми терм беҳиҷоб ме ояд

از آن به چشم ترم بی‌حجاب می‌آید

Ки кори оина гоҳе з об ме ояд

که کار آینه گاهی ز آب می‌آید

Агарчӣ дида ба поят наме тавонам суд

اگرچه دیده به پایت نمی‌توانم سود

Хушам ки ашки миннат то рикоб ме ояд

خوشم که اشک منت تا رکاب می‌آید

Чу бинмт натавонам ки забт гиря кунам

چو بینمت نتوانم که ضبط گریه کنم

зи дӯди зулф ба чашми ман об ме ояд

ز دود زلف به چشم من آب می‌آید

Ба малики ҳасан касе бо ту рӯбаҳ рӯ нашавад

به ملک حسن کسی با تو روبه‌رو نشود

Сухан дар оина ва офтоб ме ояд

سخن در آینه و آفتاب می‌آید

Ҳаё ба гӯшаи он чашми маст ҷо карда

حیا به گوشه آن چشم مست جا کرده

Чу зоҳидӣ ки ба базм шароб ме ояд

چو زاهدی که به بزم شراب می‌آید

зи кишт сӯхтаам бас ки дӯд май хезад

ز کشت سوخته‌ام بس که دود می‌خیزد

Сиришки раҳм ба чашм саҳоб ме ояд

سرشک رحم به چشم سحاب می‌آید

Ба кору бори ҷаҳони дидаро дигар магушо

به کار و بار جهان دیده را دگر مگشا

Чаҳ фоли офият аз ин китоб ме ояд

چه فال عافیت از این کتاب می‌آید

Кадоми хирмани гулро кашида дар оғӯш

کدام خرمن گل را کشیده در آغوش

Каз оби оинаи буи гулоб ме ояд

کز آب آینه بوی گلاب می‌آید

Ҷавоби номаи ҳамин пора кардан аст кулем

جواب نامه همین پاره کردن است کلیم

Магӯ ки қосиди мо беҷавоб ме ояд

مگو که قاصد ما بی‌جواب می‌آید