Дилам ба малики қаноат нишон наме донад

دلم به ملک قناعت نشان نمی‌داند

Фиғон ки ин саги нафас устихон наме донад

فغان که این سگ نفس استخوان نمی‌داند

Шитоби умри диламро ба шиква оварда

شتاب عمر دلم را به شکوه آورده

Ҷарас ба ҷузи гила корвон наме донад

جرس به جز گله کاروان نمی‌داند

Яке сети анҷуману хилватами зи шӯри ҷунун

یکی‌ست انجمن و خلوتم ز شور جنون

Ки гирдбоди канор ва миён наме донад

که گردباد کنار و میان نمی‌داند

Ба сони шуълаи забонам ба аҷзи роҳи набард

به سان شعله زبانم به عجز راه نبرد

Лабам чу ҷоми лаболаб фиғон наме донад

لبم چو جام لبالب فغان نمی‌داند

Чаҳ барги шодии азин рӯзгор май хоҳӣ

چه برگ شادی ازین روزگار می‌خواهی

Ки расми хандаи гул заъфарон наме донад

که رسم خنده گل زعفران نمی‌داند

Сиррӣ ки қатъ таъаллуқ накард аз тани хеш

سری که قطع تعلق نکرد از تن خویش

Тариқи саҷдаи он остон наме донад

طریق سجدهٔ آن آستان نمی‌داند

Ҳавои зулф ту дорад дилам чу он муфлис

هوای زلف تو دارد دلم چو آن مفلس

Ки ғайри ҳинд ба олам макон наме донад

که غیر هند به عالم مکان نمی‌داند

Ҳарифи бохта бесарфа боз ме бошад

حریف باخته بی‌صرفه باز می‌باشد

зи ҳаркии дили бабрии қадар ҷон наме донад

ز هرکه دل ببری قدر جان نمی‌داند

Хаданги нолаи мо ҳамчу шуъла шамъаст

خدنگ ناله ما همچو شعله شمعست

Мусофирасту зи мақсад нишон наме донад

مسافرست و ز مقصد نشان نمی‌داند

Ба арзи ҳоли дили он чашми масти вонрсд

به عرض حال دل آن چشم مست وانرسد

з тарк нест аҷабгар забон наме донад

ز تُرک نیست عجب گر زبان نمی‌داند

Дарин замонаи зи ҳам ҳасану ишқ бе хабаранд

درین زمانه ز هم حُسن و عشق بی‌خبرند

Чамангар об хӯрд боғбон наме донад

چمن گر آب خورد باغبان نمی‌داند

Кулем нолаи ман сар ба роҳ на фалакаст

کلیم ناله من سر به راه نه فلکست

Вале зи дили раҳи ком ва забон наме донад

ولی ز دل ره کام و زبان نمی‌داند