Зиҳии гирифта ба теғи забони ҷаҳони сухан

زهی گرفته به تیغ زبان جهان سخن

Вуқуф ёфта зеҳни ту бар ниҳони сухан

وقوف یافته ذهن تو بر نهان سخن

Занад Уторид , мсмори хомшии брлб

زند عطارد، مسمار خامشی برلب

Чу хомаи ду забонат кунад баёни сухан

چو خامۀ دو زبانت کند بیان سخن

Барои рҷми шаётини ҷаҳл сохта анд

برای رجم شیاطین جهل ساخته اند

Нуҷуми фикри турои зеби осмони сухан

نجوم فکر ترا زیب آسمان سخن

Мураббии сухани имрӯзи табъи тест ки ҳаст

مربّی سخن امروز طبع تست که هست

з хон дониши ту мағзи устихони сухан

ز خوان دانش تو مغز استخوان سخن

Румузи ваҳии таҷаллӣ куҷо кунад бар дил

رموز وحی تجلّی کجا کند بر دل

Агар набошад лафзи ту тарҷумони сухан ?

اگر نباشد لفظ تو ترجمان سخن ؟

Хиради натоиҷи фикри туро бгоҳ баён

خرد نتایج فکر ترا بگاه بیان

Нахонд ҷузи халафи алсдқи хонадони сухан

نخواند جز خلف الصّدق خاندان سخن

зи калаки тира ӣ ту равшанаст оби улӯм

ز کلک تیره ی تو روشنست آب علوم

Зтоби хотири ту пухтаи гашти нони сухан

زتاب خاطر تو پخته گشت نان سخن

Кунӣ бтиғи забони ҷӯии хӯни зи чашми равон

کنی بتیغ زبان جوی خون ز چشم روان

Чугоҳ ваъзи диҳии равнақи синони сухан

چوگاه وعظ دهی رونق سنان سخن

Сухани дуоӣ ту гуяд ҳаме , аз он ҳрдм

سخن دعای تو گوید همی، از آن هردم

Забони ман зи гуҳар пар кунад даҳони сухан

زبان من ز گهر پر کند دهان سخن

Чигуна мадҳ ту гӯям ман шикастаи забон ?

چگونه مدح تو گویم من شکسته زبان؟

Ки менагунҷад мадҳи ту дар забони сухан

که می نگنجد مدح تو در زبان سخن

Зиҳии бқўти дониш , кашида то бен гӯш

زهی بقوّت دانش، کشیده تا بن گوش

Забони ту бгаҳи мавъизати камони сухан

زبان تو بگه موعظت کمان سخن

зи аҳди онкии суханро лаби ту бори надод

ز عهد آنکه سخن را لب تو بار نداد

Блб расед зи баси интизор , ҷони сухан

بلب رسید ز بس انتظار، جان سخن

зи пиръқл ки устод кор доноӣаст

ز پیرعقل که استاد کار داناییست

Савол кардам ман дӯш дар миёни сухан

سؤال کردم من دوش در میان سخن

Ки аз барои чаҳ як ҳафта рафт то дониш

که از برای چه یک هفته رفت تا دانش

Начед як гули маънии зи гулистони сухан ?

نچید یک گل معنی ز گلستان سخن ؟

Чаҳ мӯҷибаст ки бар шохсори минбари илм

چه موجبست که بر شاخسار منبر علم

Навой нутқ назд мурғи ошёни сухан ?

نوای نطق نزد مرغ آشیان سخن؟

зи фарзаи даҳан ӯ бҷони мустамеъон

ز فرضۀ دهن او بجان مستمعان

Чаро нмирсд аз ғайби корвони сухан ?

چرا نمیرسد از غیب کاروان سخن؟

Ҷавоб дод ки гирам ки худ знолаҳи ман

جواب داد که گیرم که خود زنالۀ من

Бигӯаш ту нарасед ин ҳамаи фиғони сухан

بگوش تو نرسید این همه فغان سخن

Хабари надории охир ки нотавон гаштаст

خبر نداری آخر که ناتوان گشتست

Касе ки хотир ӯ медиҳад тавон сухан

کسی که خاطر او می دهد توان سخن

Чигуна кори сухан барқарор хоҳад буд

چگونه کار سخن برقرار خواهد بود

Чу музтариб буд аз оризаи ҷаҳони сухан

چو مضطرب بود از عارضه جهان سخن

Чу ин сухан бадалам мерасед аз раҳи гӯш

چو این سخن بدلم می رسید از ره گوش

Зҷони баромади мискини дилами басони сухан

زجان برآمد مسکین دلم بسان سخن

Забони хиҷлати ман гирди узри брмигшт

زبان خجلت من گرد عذر برمیگشت

Вале набӯд марои он замони забони сухан

ولی نبود مرا آن زمان زبان سخن

Бзоҳр арча ки тқсиргўнаҳ ӣӣ рафтаст

بظاهر ارچه که تقصیرگونه یی رفتست

Бтҳмтӣ накушуд андарин гумони сухан

بتهمتی نکشد اندرین گمان سخن

Замири ман ҳамаи шаб бо ту роз ме гуяд

ضمیر من همه شب با تو راز می گوید

Вагарнаи боздиҳами як бики нишони сухан

وگرنه بازدهم یک بیک نشان سخن

Заранги даъвии ман буи сидқ ме ояд

ز رنگ دعوی من بوی صدق می‌آید

Хўдогҳсти замирати зи сӯзёни сухан

خود آگهست ضمیرت ز سوزیان سخن

Хиради лагоми басар боз мезанад ки чаро

خرد لگام بسر باز می زند که چرا

Фурӯ гузоштаам пеши ту Аннани сухан ?

فرو گذاشته ام پیش تو عنان سخن؟

Збс ки пои турои брмнсти дасти мнн

زبس که پای ترا برمنست دست منن

Бурӣда шуд паии узрами зи остони сухан

بریده شد پی عذرم ز آستان سخن

Шикоятии зи сухан бо ту боз хоҳам ронад

شکایتی ز سخن با تو باز خواهم راند

Ки аз аҷоиб даҳраст достони сухан

که از عجایب دهرست داستان سخن

Бузургтар зи сухани меҳнатӣ наме байнам

بزرگتر ز سخن محنتی نمی بینم

Ки нест ҳосил ӯ ҷуз ки имтиҳони сухан

که نیست حاصل او جز که امتحان سخن

Нигоҳ кардаму андрмён ҳама суханаст

نگاه کردم و اندرمیان همه سخنست

Азин карони сухани тобдони карони сухан

ازین کران سخن تابدان کران سخن

Задуд синаи аҳли сҳн сиёҳ шудаст

زدود سینۀ اهل سحن سیاه شدست

Дили дуот ки он ҳаст дудмони сухан

دل دوات که آن هست دودمان سخن

Бгоҳ хеши ҳама гуфтанӣ шавад гуфта

بگاه خویش همه گفتنی شود گفته

Гарми замон буд аз умри ҷовдони сухан

گرم زمان بود از عمر جاودان سخن

Сухани зи хомау дафтар дигар нахоҳам гуфт

سخن ز خامه و دفتر دگر نخواهم گفت

Ки рӯй хомаи сияҳ бо дўхон вамон сухан

که روی خامه سیه با دوخان ومان سخن