Мапурс каз ту чигуна шикастаи дили баргашт
مپرس کز تو چگونه شکستهدل برگشت
Маи чаҳордаҳ чун борахти баробари гашт
مه چهارده چون با رُخت برابر گشت
зи шарм рӯй ту сар дар ҷаҳони ниҳоди чунон
ز شرم روی تو سر در جهان نهاد چنان
Ки то қиёмат хоҳад бъолми андари гашт
که تا قیامت خواهد به عالم اندر گشت
Падед шуд зи ҳилоли устихони паҳлавӣ ӯ
پدید شد ز هلال استخوان پهلوی او
зи бас ки моҳи зиришки ту зарду лоғари гашт
ز بس که ماه ز رَشک تو زرد و لاغر گشت
Чу маи чунин буд аз рашки ту чигуна буд
چو مه چنین بود از رشک تو چگونه بوَد؟
Касе ки ошиқи он рӯй моҳи пайкари гашт
کسی که عاشق آن روی ماهپیکر گشت؟
Заранг рӯй ту саҳни замин гулистон шуд
ز رنگ روی تو صحن زمین گلستان شد
зи буии зулфи ту мағзи ҳавои муаттари гашт
ز بوی زلف تو مغز هوا معطّر گشت
Даҳони танги туу шахси ман дар орзӯяш
دهان تنگ تو و شخص من در آرزویش
Латифаи иист ки андари хаёли мзмри гашт
لطیفهییست که اندر خیال مضمر گشت
Бтнз гуфтам гулро : чу рӯй ёри манӣ
به طنز گفتم گل را: «چو روی یار منی!»
Сабки бқҳқаҳи дршд , магараши бовари гашт
سبک به قهقه درشد، مگرش باور گشت؟
Нахусти зулфи ту оташ бирез паҳлавии хеш
نخست زلف تو آتش به زیر پهلوی خویش
Бгстрид ва пас онгаҳ чунин ситамгари гашт
بگسترید و پس آنگه چنین ستمگر گشت
Чу тӯтӣ аз дар зиндон оҳанаст касе
چو طوطی در زندان آهن است کسی
Ки бо ҳаловати лаъли ту гирди шукри гашт
که با حلاوت لعل تو گرد شکّر گشت
Чу кас нахурд бар аз сарви ман чигуна хӯрам
چو کس نخورد بر از سرو، من چگونه خورم؟
зи қомати ту ? ки чун сарви ёсумани баргашт
ز قامت تو؟ که چون سرو یاسمن برگشت
Бтиғи ғамзаи нигоро кунун ки якбора
به تیغ غمزه نگارا کنون که یکباره
Ҳамаи мамолики дилҳо турои мусаххари гашт
همه ممالک دلها ترا مسخّر گشت
Ғамат бигард дил ман бигӯ чаҳ мегардад ?
غمت بهگرد دل من بگو چه میگردد؟
Карӣ ҳаме кунадаш гирди ин муҳақари гашт
کری همی کندش گرد این محقّر گشت
Дилами зи ҷоми висоли ту шарбатӣ нӯшед
دلم ز جام وصال تو شربتی نوشید
Чунонкӣ буд зи ишқи ту он чунонтар гашт
چنانکه بود ز عشق تو آنچنانتر گشت
зи калаки хоҷаи магари гӯш тарбият дорад
ز کلک خواجه مگر گوش تربیت دارد
Чунин ки мардуми чашми ту саҳарпарвар гашт
چنین که مردم چشم تو سِحرپرور گشت
Ҷаҳон шавад чу даҳони ту танги пари гавҳар
جهان شود چو دهان تو تنگ پر گوهر
Кунун ки чашми марои дасти хоҷаи ёвари гашт
کنون که چشم مرا دست خواجه یاور گشت
Хдоигони судӯри замонаи фахриддин
خدایگان صدور زمانه فخرالدّین
Ки хоки поиш бар фарқи чархи афсари гашт
که خاک پایش بر فرق چرخ افسر گشت
Шикваи дасти вазорат ки гирди мавкиб ӯ
شکوه دست وزارت که گرد موکب او
Бидида фалаки андари зрўри ағбри гашт
بدیدۀ فلک اندر ذرور اغبر گشت
Бдонки мояи даҳ офтоб ҳиммат ӯст
بدانکه مایهدهِ آفتاب همّت اوست
Бики киришмаи хуршеди кони тавонгари гашт
به یک کرشمهٔ خورشید، کانِ توانگر گشت
Бпиши райши субҳи ардм мукошифа зад
به پیش رایش صبح ار دَم ِ مکاشفه زد
Бибин чигуна нафас дар гулӯяши ханҷари гашт
ببین چگونه نفس در گلویش خنجر گشت
Чу ғунча ҳар ки дил аз меҳр ӯ надорад пар
چو غنچه هر که دل از مهر او ندارد پر
Сараши зи мағзи тиҳӣ чун димоғи ъбҳри гашт
سرش ز مغز تهی چون دماغ عبهر گشت
зи бас ки аз сари ихлоси мадҳ ӯ хонанд
ز بس که از سر اخلاص مدح او خوانند
Чу фотиҳаи ҳмгонрои санояш аз баргашт
چو فاتحه همگانرا ثنایش از بر گشت
Чу офтоби баҳри ҷонибӣ ки рӯй оварад
چو آفتاب به هر جانبی که روی آورد
Рикоби азми ҳумоюн ӯ Музаффари гашт
رکاب عزم همایون او مظفّر گشت
Чу наргиси онкии бҳкмши ниҳода гардан нест
چو نرگس آنکه به حکمش نهادهگردن نیست
Бараҳнаи пойу тиҳии даст чун санавбари гашт
برهنهپای و تهیدست چون صنوبر گشت
Шарори оташи азмаши зи фарти истеъло
شرار آتش عزمش ز فرط استعلا
Бар осмона гардун нишасту ахтари гашт
بر آسمانۀ گردون نشست و اختر گشت
Зиҳии шигарфи атое ки дар манасаи фазл
زهی شگرف عطایی که در منصّۀ فضل
Арӯси нотиқаро мадҳати ту зевари гашт
عروس ناطقه را مدحت تو زیور گشت
Наёфт ганҷи назири ту дар мтоўии хеш
نیافت گنج نظیر تو در مطاوی خویش
Сипеҳр бар шуда ҳар чанд гирди худ баргашт
سپهر بر شده هر چند گرد خود برگشت
Замини ҳазрати тести осмон аз он сатҳаш
زمین حضرت تست آسمان از آن سطحش
зи бӯсҳои кавокиби чунин мҷдри гашт
ز بوسههای کواکب چنین مجدّر گشت
Садои сяти ту шояд ки панҷ навба занад
صدای صیت تو شاید که پنج نوبه زند
Ки чори гӯша олам бирав муқарари гашт
که چار گوشهٔ عالم بر او مقرّر گشت
Ба атфи домани лутф ту кард астрўоҳ
به عطف دامن لطف تو کرد استرواح
Касе ки сӯхтаи хотири зи ғам чу миҷмари гашт
کسی که سوختهخاطر ز غم چو مجمر گشت
Фалаки боби вафои ту рӯй меҳр бишуст
فلک بهآب وفای تو روی مهر بشست
зи акси чеҳра ӯ зон ҷаҳони мунаввари гашт
ز عکس چهره او زان جهان منوّر گشت
Ҳаёт ӯ накушуд низ бори миннати ҷон
حیات او نکشد نیز بار منّت جان
Танӣ ки лутфи ту дар қолабаши мусаввири гашт
تنی که لطف تو در قالبش مصّور گشت
Бадасти роди ту ташбеҳ баҳр ме кардам
بهدست راد تو تشبیه بحر میکردم
Дар андаруни садафи қатраи ақди гавҳари гашт
در اندرون صدف قطره عقد گوهر گشت
Намӯна ӣӣ зи замири ту хост кард фалак
نمونهای ز ضمیر تو خواست کرد فلک
Таба бар омад ва он асли унсури хури гашт
تبه بر آمد و آن اصل عنصر خوَر گشت
Кафи ту манбаи ҷўдсти вазон кафш хонанд
کف تو منبع جودست وزان کفش خوانند
Ки бар сари омадаи ҳафт баҳри ахзари гашт
که بر سر آمدۀ هفت بحر اخضر گشت
Ҷаҳони зи пари ту рои ту ҷом касрӣ шуд
جهان ز پرتو رای تو جام کسری شد
Фалаки зи нафхаи халқи ту гӯии анбари гашт
فلک ز نفخۀ خلق تو گوی عنبر گشت
Ниҳояти амли сарварон аср инаст
نهایت امل سرورانِ عصر اینست
Ки дар мабодии давлати турои муяссари гашт
که در مبادی دولت ترا میسّر گشت
На ҳар ки ӯ қаламӣ ёфт чун ту хоҳад шуд
نه هر که او قلمی یافت چون تو خواهد شد
На ҳар ки ӯ камарии баст чун ду пайкари гашт
نه هر که او کمری بست چون دو پیکر گشت
Бхўни душмани ҷоҳи ту гар нашуд ташна
به خون دشمن جاه تو گر نشد تشنه
Чаро сипеҳри ҳамаи дили даҳон чу соғари гашт ?
چرا سپهر همه دل دهان چو ساغر گشت؟
Хаёли даст ту бигузашт бар дили ғунча
خیال دست تو بگذشت بر دل غنچه
Дақиқаҳои замираши азин сабаби зргшт
دقیقههای ضمیرش ازین سبب زر گشت
Мҳобти ту ҷаҳон танг кард бар гардун
مهابت تو جهان تنگ کرد بر گردون
Чу душмани ту азон хам гирифту чанбари гашт
چو دشمن تو ازان خَم گرفت و چنبر گشت
На ҳам зи бأси ту чун доираи сети саргашта ?
نه هم ز بأس تو چون دایرهست سرگشته؟
Чу нуқтаи гир ки хасми ту ҷумлаи тани сари гашт
چو نقطه گیر که خصم تو جمله تن سر گشت
Чу бор дод ҷаноби ту аҳли маънӣ ро
چو بار داد جناب تو اهل معنی را
Ҳаром бошад азин пас бигард ҳар дар гашт
حرام باشد ازین پس بهگرد هر در گشت
Ҳунари зи дасти ҷаҳони нек дар сари омада буд
هنر ز دست جهان نیک در سر آمده بود
Вале бдўлти ту корҳоши дигари гашт
ولی به دولت تو کارهاش دیگر گشت
Агар чаҳ ҳамчуи смр буд дар бадари гардон
اگر چه همچو سمر بود در بدر گردان
Бмихи эҳсон бар даргаати мсмри гашт
به میخ احسان بر درگهت مسمّر گشت
Сухан ки буд чу тӯмори сари фурӯи барда
سخن که بود چو طومار سر فرو برده
Чу дафтар аз ҳаваси мадҳати ту сад пари гашт
چو دفتر از هوس مدحت تو صد پَر گشت
Замонаи дасти бдндони ҳамеи баради зи ҳасад
زمانه دست به دندان همیبرد ز حسد
БолтФотӣ каз ту насиби чокари гашт
به التفاتی کز تو نصیب چاکر گشت
Ҳамин шарафи зи ҷаҳони баси маро ки мадҳати ту
همین شرف ز جهان بس مرا که مدحت تو
Марои бдўлти ту нақш рӯй дафтари гашт
مرا به دولت تو نقش روی دفتر گشت
Чу арза кардам бар табъи бастаи мадҳи туро
چو عرضه کردم بر طبع بسته مدح ترا
зи аҷзи хеши хаҷали гашт ва дар арақтар гашт
ز عجز خویش خجل گشت و در عرق تر گشت
На ҳам зи лафзи ту тшўир хӯрд май бояд
نه هم ز لفظ تو تشویر خورد میباید
Гирифтам онкии ҳамаи слсбилу кавсари гашт
گرفتم آنکه همه سلسبیل و کوثر گشت
зи пари ту назарӣ каз ту бар раҳе афтод
ز پرتو نظری کز تو بر رهی افتاد
Ту шӯхи чашмӣ ӯ байн ки чун диловари гашт
تو شوخچشمی او بین که چون دلاور گشت
Ки сӯии ҳазрати ту тӯҳфаи шеър май орад
که سوی حضرت تو تحفه شعر میآرد
Магари зи ғоят бе донишяши сар бар гашт
مگر ز غایت بی دانشیش سر بر گشت
Грини сафина на киштии Нӯҳро ҳамтост
گر این سفینه نه کشتی نوح را همتاست
Басӯии ҷўдии дастат чигуна раҳбари гашт ?
بسوی جودی دستت چگونه رهبر گشت؟
Сафинаро баҳамаи ҳоли лангарӣ бояд
سفینه را به همه حال لنگری باید
Барин сафинаи гаронии бандаи лангари гашт
برین سفینه گرانیّ بنده لنگر گشت
Дуои давлат ту гуфт хостами зини пеш
دعای دولت تو گفت خواستم زین پیش
Вале зи бими малолати сухани мбтри гашт
ولی ز بیم ملالت سخن مبتّر گشت