Куҷое эй ба ду рухи офтоби дилдорӣ ?
کجایی ای به دو رُخ آفتابِ دلداری؟
Чигунае ки нае ҳеҷ ҷои дидорӣ ?
چگونهای که نهای هیچ جایْ دیداری؟
Биёу хуии фарои мардумӣ ва мардум кун
بیا و خوی فرا مردمیّ و مردم کن
Ки ҳеҷ ҳосил ноед зи мардуми озорӣ
که هیچ حاصل ناید ز مردمآزاری
Ҳикояти ғами дил бо ту ман чаро гӯям ?
حکایتِ غمِ دل با تو من چرا گویم؟
Ту худ зи ҳоли ману дили фароғатии дорӣ
تو خود ز حالِ من و دل فراغتی داری
Ба кори ишқи ту дар , ҳастам он чунон бедор
به کارِ عشقِ تو در، هستم آنچنان بیدار
Ки кори ман ҳама бехобӣасту ғмхўорӣ
که کارِ من همه بیخوابی است و غمخواری
Ту ҳоли банда чаҳ доне ? ки бугзарад шаб ҳо
تو حالِ بنده چه دانی؟ که بگذرد شبها
Ки наргис ту набинад ба хоб , бедорӣ
که نرگسِ تو نبیند به خواب، بیداری
зи офтоби фалак , пеши ман ъзизтрӣ
ز آفتابِ فلک، پیشِ من عزیزتری
Вгрчаҳи доим дар парда , сояи кирдорӣ
وگرچه دایم در پرده، سایهکرداری
Маро ки орзӯии офтоб хонагӣаст ,
مرا که آرزویِ آفتابِ خانگی است،
Чаҳ гирди хезади азин офтоби бозорӣ ?
چه گَرد خیزد ازین آفتابِ بازاری؟
Ба зери зулфи ту манзил гирифт некуӣ
به زیرِ زلفِ تو منزل گرفت نیکویی
зи чашми масти ту парҳез кард ҳушёрӣ
ز چشمِ مستِ تو پرهیز کرد هشیاری
Шавад сиёҳии шаби шаста аз рухи олам
شود سیاهیِ شب شُسته از رخِ عالَم
Гар об рӯй туро ашк ман кунад ёрӣ
گر آبِ روی تو را اشکِ من کند یاری
Вале чаҳ суд ? ки ҳар лаҳза чарх омӯзад
ولی چه سود؟ که هر لحظه چرخ آموزد
зи акси зулфати туу бахти ман сияҳи корӣ
ز عکسِ زلفتِ تو و بخت من سیهکاری