Моҳи руъёи зи ғамати як дам нест

ماه رویا! ز غمت یک دم نیست

Ки чу зулфи ту дилам дар ҳам нест

که چو زلف تو دلم درهم نیست

Зулфу болои ту то ҳам пуштанд

زلف و بالای تو تا هم پشتند

Пушту болой касе бехам нест

پشت و بالای کسی بی‌خم نیست

Ғам ту мехӯраму шодам аз онк

غم تو می خورم و شادم از آنک

Ҳар кро ҳаст ғами ту ғам нест

هر کرا هست غم تو غم نیست

Даст дар домани зулфи ту ки зад ?

دست در دامن زلف تو که زد؟

Ки дил ӯ чу рахт хуррам нест

که دل او چو رخت خرّم نیست

Ба қалами шарҳ ғамат надаҳум аз онк

به قلم شرح غمت ندهم از آنک

Ду забонаст қалам муҳаррам нест

دو زبانست قلم محرم نیست

Моҷароҳои дарозаст маро

ماجراهای درازست مرا

Бо ки гӯям чу касам ҳамдам нест

با که گویم چو کسم همدم نیست

Ҳамдами ман зи ҷаҳони субҳ ва сабост

همدم من ز جهان صبح و صباست

Биҷузин ҳамдамам аз олам нест

بجز این همدمم از عالم نیست

Роз бо субҳ нишоед гуфтан

راز با صبح نشاید گفتن

Ки варои банди забон муҳкам нест

که ورا بند زبان محکم نیست

Бо сабо низ магӯем ки сабо

با صبا نیز مگویم که صبا

Ҳаст ҳар ҷоеу муҳаррам ҳам нест

هست هرجایی و محرم هم نیست

Биравам ҳам бхёлт гӯям

بروم هم به خیالت گویم

Ки аз ӯ муҳаррам тар донам кист

که از او محرم‌تر دانم کیست