Шаб нест кам зи ҳиҷри ту сад ғам наме расад
شب نیست کم ز هجر تو صد غم نمی رسد
Ашками бчори гӯша олам наме расад
اشکم بچار گوشۀ عالم نمی رسد
Андари ту кӣ расм ? ки насими саҳаргаҳӣ
اندر تو کی رسم؟ که نسیم سحرگهی
Дар гирди он кулолаи пар хам наме расад
در گرد آن کلالۀ پر خم نمی رسد
Дар чашм ман бараст қади сарви пайкарат
در چشم من برست قد سرو پیکرت
Зон пилки чшмҳом фароҳам наме расад
زان پلک چشمهام فراهم نمی رسد
Аз бас ки хоки кӯии ту дрдидаҳҳо кашанд
از بس که خاک کوی تو دردیده ها کشند
Ҷузи гирд аз ӯ бад-ӣни дили пар ғам наме расад
جز گرد از او بدین دل پر غم نمی رسد
Фарёди ман наме рисӣ ва ин дили ғамин
فریاد من نمی رسی و این دل غمین
Аз хушки риши ҳиҷр бмрҳм наме расад
از خشک ریش هجر بمرهم نمی رسد
Шукраст агар намерасадам муждаи висол
شکرست اگر نمی رسدم مژدۀ وصال
Бории балоу меҳнату ғам кам наме расад
باری بلا و محنت و غم کم نمی رسد
Гӯям казин сипас надаҳум доманати зи даст
گویم کزین سپس ندهم دامنت ز دست
Гуфтан кунун чаҳ суд ки дастам намерасад ?
گفتن کنون چه سود که دستم نمی رسد؟
Душвори умеди васл тавон дошт каз фироқ
دشوار امید وصل توان داشت کز فراق
Моҳӣ бар омаду хабарӣ ҳам наме расад
ماهی بر آمد و خبری هم نمی رسد