эй шудаи зоти ту мстҷмъи анвоъи камол

ای شده ذات تو مستجمع انواع کمال

Нави арӯсони сухани рози санои ту ҷамол

نو عروسان سخن راز ثنای تو جمال

Ҳам срири қаламати тарҷумаи лафзи карам

هم صریر قلمت ترجمۀ لفظ کرم

Ҳам садои суханати тайраи даҳ саҳари ҳалол

هم صدای سخنت طیره ده سحر حلال

Дар раҳи фаҳми маъонии ту арбоби сухан

در ره فهم معانی تو ارباب سخن

Бас ки кардаанд сиқти ёвагии ваҳму хаёл

بس که کرده اند سقط یاوگی وهم و خیال

Нешикарро зи ҳасади таъми даҳон талх шудаст

نیشکر را ز حسد طعم دهان تلخ شدست

То ба боғи сухан аз калаки ту бар раст ниҳол

تا به باغ سخن از کلک تو بر رست نهال

Обдорсти зи ршҳи карамати теғи ҳунар

آبدارست ز رشح کرمت تیغ هنر

Дар арақи ғарқи зи шарми суханати оби зулол

در عرق غرق ز شرم سخنت آب زلال

Гар ту бо сӯрати девор дар оеи бсхн

گر تو با صورت دیوار در آیی بسخن

Ҷонвар гардад аз лутфи ҳадисат дар ҳол

جانور گردد از لطف حدیثت در حال

Чархи гуфтои ману қудрат , хирадаш гуфт хамӯш

چرخ گفتا من و قدرت، خردش گفت خموش

Ки з перон набӯд хуби суханҳои маҳол

که ز پیران نبود خوب سخنهای محال

Шуд даҳони сухан аз шукр гуфт гўшои гӯш

شد دهان سخن از شکر گفت گوشا گوش

То канори тамаъ аз ҷӯад ту шуд моломол

تا کنار طمع از جود تو شد مالامال

Аз паии ҷилваи гуҳи мадҳ ороста анд

از پی جلوه گه مدح آراسته اند

Хуби рӯйони сухани рохми зулфу хату хол

خوب رویان سخن راخم زلف و خط و خال

То ки шуд табъи Карими ту харидори сухан

تا که شد طبع کریم تو خریدار سخن

Тири гардунро бррсти зи шодии пару бол

تیر گردون را بررست ز شادی پر و بال

эй зи алфози ту танги омада бар шукри ҷой

ای ز الفاظ تو تنگ آمده بر شکّر جای

Дар санои ту суханро чаҳ фарохаст маҷол ?

در ثنای تو سخن را چه فراخست مجال؟

Бо бузургии ту ҳам ҷой сухан бошад низ

با بزرگیّ تو هم جای سخن باشد نیز

Гар фиристем биҷои суханати ақди лол

گر فرستیم بجای سخنت عقد لآل

Аз талабкории ту сар ба фалаки боз наад

از طلبکاری تو سر به فلک باز نهد

Сухани банда ки борӣк тарамад зи ҳилол

سخن بنده که باریک تر امد ز هلال

Ту сухани хоста ӣӣ аз ман ва ман худ ҳамаи умр

تو سخن خواسته یی از من و من خود همه عمر

Хостам то сухани хеши расонами бкмол

خواستم تا سخن خویش رسانم بکمال

Лек маъзӯри ҳамеи дор ки аз даҳшати ту

لیک معذور همی دار که از دهشت تو

Шуд забони сухани андари даҳани нотиқаи лол

شد زبان سخن اندر دهن ناطقه لال

Боди поёни суханро қаламам зон пай кард

باد پایان سخن را قلمم زان پی کرد

То аз эшон ба бисотат нарасад гирди ҳилол

تا از ایشان به بساطت نرسد گرد هلال