эй бузургӣ ки аз мёи ман ва ту

ای بزرگی که از میا من و تو

Ҳамаи ҳоҷоти аҳл фазл равост

همه حاجات اهل فضل رواست

Табъи ту обу хотирати оташ

طبع تو آب و خاطرت آتش

Ҳалами ту кӯҳ ва ҳимматат дарёст

حلم تو کوه و همّتت دریاست

То сӯии ман зи ҷониби карамат

تا سوی من ز جانب کرمت

Илтифотӣ нарафта мдтҳост

التفاتی نرفته مدّتهاست

?назарет нест сӯии сифлагӣон

نظرت نیست سوی سفلگیان

Зон ки қасдат ба олам болост

زان که قصدت به عالم بالاست

Гар ба хизмати расм ва гар нарасм

گر به خدمت رسم و گر نرسم

Як забонами пар аз дуо ва саност

یک زبانم پر از دعا و ثناست

Мадади ҳимматии дареғи мадор

مدد همّتی دریغ مدار

Ки ёри ман аз ямин шумост

که یار من از یمین شماست

Ногаҳон дар муҳиммии афтодам

ناگهان در مهّمی افتادم

Ки туро низ бод агар чаҳ балост

که ترا نیز باد اگر چه بلاست

Шаби торику фикри гӯногӯн

شب تاریک و فکر گوناگون

Неки доне ки мӯҷиб савдост

نیک دانی که موجب سوداست

Хосса чун шамъ дар миён набӯд

خاصه چون شمع در میان نبود

Ки бадви инс мардум доност

که بدو انس مردم داناست

Чашмҳо гарчи равшанаст ба ҷамъ

چشمها گرچه روشنست به جمع

Ҷамъ бешам чашм нобӣност

جمع بی شم چشم نابیناست

Ба шаби онро ки равшаноӣ нест

به شب آنرا که روشنایی نیست

Гар ҳазорон такаллуфаст ҳбост

گر هزاران تکلّفست هباست

Нест пайдои марои зи торикӣ

نیست پیدا مرا ز تاریکی

Ки чапи ман кҷоўр аст куҷост

که چپ من کجاور است کجاست

Бидиҳ ангушту шамъ май ҷустам

بده انگشت و شمع می جستم

Ки чунин ҳимматии баланди крост

که چنین همّتی بلند کراست

Ки кунад ваҷҳи шамъи ман равшан

که کند وجه شمع من روشن

Гар ба ҷинс худаст вгрббҳост

گر به جنس خودست وگرببهاست

Оқибат ақл раҳнамоем гуфт

عاقبت عقل رهنمایم گفت

Ман бигӯям чу шамъ равшан варост

من بگویم چو شمع روشن وراست

Хоҷа мо ҳаст вдри шаби торик

خواجه ما هست ودر شب تاریک

Равшанои зи моҳ бояд хост

روشنایی ز ماه باید خواست

Зуди парвона ӣӣ ба шамъ бидиҳ

زود پروانه یی به شمع بده

Ки зи савдои шаб дилам бархест

که ز سودای شب دلم برخاست

Бидиҳ он шамъ ва ин шкрбстон

بده آن شمع و این شکربستان

Зон ки байъи шукр ба шамъ равост

زان که بیع شکر به شمع رواست