Расед мужда ки инак сабоҳ ид расед

رسید مژده که اینک صباح عید رسید

Тараб гузин шудаи ринди шқӣу шайхи Саид

طرب گزین شده رند شقی و شیخ سعید

Нишотро шудаи омодаи орифу омӣ

نشاط را شده آماده عارف و عامی

зи бас ба боғи санавбари ситод ва сарв чамед

ز بس به باغ صنوبر ستاد و سرو چمید

Ба Тифли ғунча нигар шуд мроҳқ аз баси шер

به طفل غنچه نگر شد مراهق از بس شیر

Ба маҳди барги зи пистони моам шох макед

به مهد برگ ز پستان مام شاخ مکید

Замин метро байн ки зинда омад боз

زمین میت را بین که زنده آمد باز

Магари Масеҳи насимаш ба ҷайб нафха дамид

مگر مسیح نسیمش به جیب نفخه دمید

Ва ё зи фарти латофати дубора бар тани он

و یا ز فرط لطافت دوباره بر تن آن

Шамеми дӯсти басони насими субҳи вазид

شمیم دوست بسان نسیم صبح وزید

Чамани сипеҳр ва дарахтаст савр ва бар шохаш

چمن سپهر و درخت است ثور و بر شاخش

Нигари ту манзили парвину хонаи ноҳид

نگر تو منزل پروین و خانه ناهید

Ҳавои чунон тараб ангез шуд ки зоҳиди шаҳр

هوا چنان طرب انگیز شد که زاهد شهر

Фурухт хирқа ба пери Муғону бодаи харид

فروخت خرقه به پیر مغان و باده خرید

Бхост аз сари саҷҷодау бтрФи чаман

بخاست از سر سجاده و بطرف چمن

Ба тоқи абрӯӣ соқӣ нишаст ва ҷом кашид

به طاق ابروی ساقی نشست و جام کشید

Ман аз ҷдоӣии ҷонон ба кулбаи аҳзон

من از جدائی جانان به کلبه احزان

Сиррӣ ба ҷайби тафаккури зи мосўии навмед

سری به جیب تفکر ز ماسوی نومید

Ки ногаҳони бхёл аз дирам даромад ёр

که ناگهان بخیال از درم درآمد یار

Басӯии кулба назар карду ҷониб ман дид

بسوی کلبه نظر کرد و جانب من دید

Чаҳ дид , дид яке мурда аз балои фироқ

چه دید، دید یکی مرده از بلای فراق

Чаҳ дид , дид яке монда дар ғами ҷовид

چه دید، دید یکی مانده در غم جاوید

Ба ноз ва кибр нишаст он гуҳ аз тафаққуд ва дод

به ناز و کبر نشست آن گه از تفقد و داد

Бад-ӣни балокаш бе дили зи боғу роғи навид

بدین بلاکش بی دل ز باغ و راغ نوید

Чаҳ гуфт ? гуфт магари чашму гӯшт аз ҳиҷрам

چه گفت؟ گفت مگر چشم و گوشت از هجرم

Надид рӯй гулу бонги мурғро нишнид

ندید روی گل و بانگ مرغ را نشنید

Ки масканат шуда , эй ринди масти кулбаи тор

که مسکنت شده، ای رند مست کلبه تار

Ки ҳамдамат шуда аз ҳарчӣ ҳаст фикри ваъид

که همدمت شده از هرچه هست فکر وعید

Чунин ба посухаш оварадам ин латифаи нағз

چنین به پاسخش آوردم این لطیفه نغز

Ки шуд хаёли туами гулбуну санавбару бед

که شد خیال توام گلبن و صنوبر و بید

Магӯ марои зи бсотин ки бе туами ҷинот

مگو مرا ز بساتین که بی توام جنات

Чу дӯзах омад ва онгаҳ гуноҳкори убайд

چو دوزخ آمد و آنگه گناهکار عبید

Маро бидида нишинад чу нештар сабза

مرا بدیده نشیند چو نیشتر سبزه

зи баси бпои дилам бе ту хор ҳиҷр халид

ز بس بپای دلم بی تو خار هجر خلید

Пас аз муколама дидам ки иннигор буд

پس از مکالمه دیدم که این نگار بود

Ба ғамза алҳақ ҷаллоди сад ҳазор шаҳид

به غمزه الحق جلاد صد هزار شهید

Бар офтоби Рахши тӯдаи тӯдаи анбартар

بر آفتاب رخش توده توده عنبرتر

зи инқилоби мааши нофаи нофаи машки падед

ز انقلاب مهش نافه نافه مشک پدید

зи ҷавр ӯ , бар ӯ доварии ҳамеи барадам

ز جور او، بر او داوری همی بردم

Ки довараши рух ва зулфаст бар сиёҳу сипед

که داورش رخ و زلف است بر سیاه و سپید

Зиҳии шаҳӣ ки бъдлти паланги ҳофизи гӯр

زهی شهی که بعدلت پلنگ حافظ گور

Ба дашти ҳасани туам аз чаҳ шер ишқ дарид

به دشت حسن توام از چه شیر عشق درید

Ҷиўши Подшаҳон аз чаҳ малик чанд гирифт

جیوش پادشهان از چه ملک چند گرفت

СиўФи ширдилон аз чаҳ фарқ хасм кунед

سیوف شیردلان از چه فرق خصم کنید

Тўрости лашкар ҳиндӯ бигард кишвари рӯм

توراست لشکر هندو بگرد کشور روم

Тўрости сорми абрӯ ба тораки хуршед

توراست صارم ابرو به تارک خورشید

Бар офтоби рахт то ҳилол абрӯ ёфт

بر آفتاب رخت تا هلال ابرو یافت

Басони теғи зи ғайрати қад сипеҳр хамед

بسان تیغ ز غیرت قد سپهر خمید

Хушам ки чашмаи Хизраши ниҳон ба ҷавҳар буд

خوشم که چشمه خضرش نهان به جوهر بود

зи теғи абрӯят ар сайди дил бхўн ғалатед

ز تیغ ابرویت ار صید دل بخون غلطید

Рухи ту хулду даҳони слсбилу лаби ғунча

رخ تو خلد و دهان سلسبیل و لب غنچه

Ниҳон ба ғунча касе слсбилро нишнид

نهان به غنچه کسی سلسبیل را نشنید

Ба даргаи ту салотини малики ҳасан , ғулом

به درگه تو سلاطین ملک حسن، غلام

Ба мактаби ту Флотўни дарси ишқ , валид

به مکتب تو فلاطون درس عشق، ولید

Ба авҷи васфи хиромати набарди роҳ ва наҷуст

به اوج وصف خرامت نبرد راه و نجست

Агарчӣ тоири ақлами ҳазор сол парид

اگرچه طایر عقلم هزار سال پرید

Ба чашмаи лаби нўшинти он чунон афсар

به چشمه لب نوشینت آن چنان افسر

Дар иштиёқи мудовим ки рӯзаи дор ба ид

در اشتیاق مداوم که روزه دار به عید

Агар ба рӯй ту лғзиди пои дил аз хашм

اگر به روی تو لغزید پای دل از خشم

Биноз нози мсўзш ки дард ҳиҷр кашид

بناز ناز مسوزش که درد هجر کشید

Танам ба бистар ранҷаст мубтало , ки чаро

تنم به بستر رنج است مبتلا، که چرا

Ҷудои зи кӯй туам кард рӯзгор анед

جدا ز کوی توام کرد روزگار عنید

Мудом то буд аз қурбу баъди ному нишон

مدام تا بود از قرب و بعد نام و نشان

Ҳамеша то буд аз ҳиҷр ва васл гуфт ва шунид

همیشه تا بود از هجر و وصل گفت و شنید

Марои зи ҳиҷру зи васли ту боди ҷону дилӣ

مرا ز هجر و ز وصل تو باد جان و دلی

Гуҳӣ ба дарди қарибу гуҳии зи ранҷи баъӣд

گهی به درد قریب و گهی ز رنج بعید