Васли ту ба ваҳм дар наме ояд

وصل تو به وهم درنمی‌آید

Васфи ту ба гуфт барнаме ояд

وصف تو به گفت برنمی‌آید

Шуд умру имории висоли ту

شد عمر و عماری وصال تو

Аз кӯии умед дар наме ояд

از کوی امید درنمی‌آید

Васли ту ба ваъда гуфт ме оем

وصل تو به وعده گفت می‌آیم

Омад аҷал , ӯ магар наме ояд

آمد اجل، او مگر نمی‌آید

Зон май ки туро насиб хасмон аст

زان می که تو را نصیب خصمان است

Як ҷуръаи маро ба сар наме ояд

یک جرعه مرا به سر نمی‌آید

Афсуни Масеҳ бар ту ме хонам

افسونِ مسیح بر تو می‌خوانم

Афсӯс ки коргар наме ояд

افسوس که کارگر نمی‌آید

Хоқонӣ кӣ расад ба гирди ту

خاقانی کی رسد به گرد تو

Чун давлат роҳбар наме ояд

چون دولت راهبر نمی‌آید