Дӯсти марои ратли ишқ то хат Бағдод дод
دوست مرا رطلِ عشق، تا خط بغداد داد
Лоҷарам аз хати сабри кори буруни аўФтод
لاجرم از خطِ صبر کار برون اوفتاد
Сабр ҳазимат гирифт каз сафи мижгон ӯ
صبر هزیمت گرفت، کز صف مژگان او
Ғамзаи камони дркшид , фитна камӣн баргушод
غمزه کمان درکشید، فتنه کمین برگشاد
Ишқ ба аввали марои ҳамчуи гул аз пои суд
عشق به اول مرا، همچو گِل از پای سود
Дӯст ба охири марои ҳамчуи гул аз даст дод
دوست به آخر مرا، همچو گُل از دست داد
То дар умеди ман ҳиҷр ба мсмор кард
تا درِ امید من، هجر به مسمار کرد
Ёди висолаши марои наъл дар оташи ниҳод
یاد وصالش مرا، نعل در آتش نهاد
намекунад аз бдхўӣӣ ончӣ накардааст кас
میکند از بدخویی، آنچه نکرده است کس
Гарчи бадӣ мекунад , чашми бадаши дўрбод
گرچه بدی میکند، چشم بدش دور باد
Сина хоқонӣаст сӯхтаи ишқ ӯ
سینهٔ خاقانی اَست، سوختهٔ عشق او
ӯ ба ҷафо медиҳад сӯхтагонро ба бод
او به جفا میدهد، سوختگان را به باد