Дил рафт ва менадонам ҳолаш ки худ куҷо шуд
دل رفت و میندانم، حالش که خود کجا شد
Озор ӯ накардам гўӣӣ дигар чаро шуд
آزار او نکردم، کویی دگر چرا شد
Ҳарҷо ки занн ббрдм рафтам талаби бкрдм
هر جا که ظن ببردم، رفتم طلب بکردم
Поем ба санг омад , пуштами зи ғами ду то шуд
پایم به سنگ آمد، پشتم ز غم، دو تا شد
Чандон ки беш ҷустам кам ёфтам нишонаш
چندان که بیش جستم، کم یافتم نشانش
Гўӣӣ чаҳ ҳолаш афтод ёрб дигар куҷо шуд
گویی چه حالش افتاد، یارب دگر کجا شد؟
Барадами бадви гумоне каз ишқи гашти руста
بردم بدو گمانی، کز عشق گشت رسته
Моно ки гашти ошиқи заннами магар хато шуд
مانا که گشت عاشق، ظنم مگر خطا شد
ё об буду ногуҳи андари замин фурӯ шуд
یا آب بود و ناگاه، اندر زمین فرو شد
ё мурғ буд ва аз дом парид дар ҳаво шуд
یا مرغ بود و از دام، پرّید در هوا شد
Гуфтам дилӣ ки дидааст пайрави ғарибу хаста
گفتم: دلی که دیده است، پیر و غریب و خسته؟
Комрўз чанд рӯзаст каз пеши мо ҷудо шуд
کهامروز چند روز است، کز پیش ما جدا شد
Ногоҳ кӯдакӣ гуфт дидам дилии шикаста
ناگاه کودکی گفت: دیدم دلی شکسته
Дар доми зулф ёрӣ афтод ва мубтало шуд
در دام زلف یاری، افتاد و مبتلا شد