Дили сикка ишқ ме нигараданд

دل سکهٔ عشق می‌نگردانَد

Ҷони хутба офият наме хонд

جان خطبهٔ عافیت نمی‌خواند

Як риштаи ҷон ба сад гиреҳ дорам

یک رشتهٔ جان به صد گره دارم

Сабраши гиреҳии кушоди натавонад

صبرش گرهی گشاد نتواند

Гуфтӣ ба Муғони рӯ ва ба ме биншин

گفتی به مغان رو و به می بنشین

Кин оташи ғами ҷуз об нанишонд

کاین آتش غم جز آب ننشاند

Рафтам ба Муғон ва ҳам надидам кас

رفتم به مغان و هم ندیدم کس

Кӯи оби тараб ба ҷӯй дил ронад

کو آب طرب به جوی دل راند

Соқӣ дидам ки ҷуръа бар оташ

ساقی دیدم که جرعه بر آتش

Май резаду хок ташна ме монад

می‌ریزد و خاک تشنه می‌ماند

Бар оташи резади оби Хизри оўх

بر آتش ریزد آب خضر آوخ

Ман хоку асири бод ва ӯ донад

من خاک و اسیر باد و او داند

Чу хоки зи ҷуръаи ҷӯшам аз ғайрат

چو خاک ز جرعه جوشم از غیرت

Кӯи ҷуръа чаро бар оташ ифшоанд

کو جرعه چرا بر آتش افشاند

Дил монад з соқем ғалат гуфтам

دل ماند ز ساقیم، غلط گفتم

Он дил ки намонад азу куҷо монад

آن دل که نمانْد ازو کجا ماند

Ҳони чашм манаст соқӣу ашкам

هان! چشم من است ساقی و اشکم

Дардасту рухами суфолро монад

دُرد است و رخم سفال را ماند

Ҷузи соқӣу дардии суфол ва май

جز ساقی و دُردی سفال و می

Аз шшдри ғами маро ки барраанд

از ششدر غم مرا که برهاند

эй пери Муғони дили шумо мурғон

ای پیر مغان دل شما مرغان

Омад шуд мо дигар наранҷоанд

آمد شد ما دگر نرنجاند

Хумор шумо надорад он ратлӣ

خمار شما ندارد آن رطلی

Кӯи ақли маро тамом бастанд

کو عقل مرا تمام بستاند

Кҳсор шумо наёрад он силӣ

کهسار شما نیارد آن سیلی

Кӯи санги марои з ҷо бигардонад

کو سنگ مرا ز جا بگرداند

Хоқонии нахл ишқ шуд тоза

خاقانی، نخل عشق شد تازه

Кӯи дасти талаб ки нахл ҷанбанд

کو دست طلب که نخل جنباند