Он дам ки субҳи бениши ман бол баргушод

آن دم که صبح بینش من بال برگشاد

Он мурғи субҳи гоҳи дилами тези пари кушод

آن مرغ صبح‌گاه دلم تیز پر گشاد

Давлати нъм сабоҳ кун нави арӯси вор

دولت نعم صباح کن نو عروس‌وار

Ҳар ҳафт карда бар дили ман ҳашт дар кушод

هر هفت کرده بر دل من هشت در گشاد

Ваон пери кӯи Халифаи китоби дил ман аст

وان پیر کو خلیفه کتاب دل من است

Чун субҳ дид сар ба муноҷот баргушод

چون صبح دید سر به مناجات برگشاد

Мурғӣ ки номаовар субҳ саодат аст

مرغی که نامه آور صبح سعادت است

Ҳар номаеро ки дошт ба минқори сари кушод

هر نامه‌ای را که داشت به منقار سر گشاد

Пайкӣ ки ӯ мубашшири даргоҳ давлат аст

پیکی که او مبشر درگاه دولت است

Дар боргоҳи синаи ман раҳгузари кушод

در بارگاه سینهٔ من رهگذر گشاد

Ҳар панҷара ки тнгтрш дид рахна кард

هر پنجره که تنگترش دید رخنه کرد

Ҳар равзанӣ ки баста турш ёфт баргушод

هر روزنی که بسته‌ترش یافت برگشاد

Омад Нидои ишқ ки хоқонии алсбўҳ

آمد ندای عشق که خاقانی الصبوح

Каз субҳи бениши ту футуҳӣ дигар кушод

کز صبح بینش تو فتوحی دگر گشاد

Бесим ва зар башу ту ва бо сим бар бисоз

بی‌سیم و زر بشو تو و با سیم‌بر بساز

Каз баҳри ту сабӯҳи дусади кӣсаи зргшод

کز بهر تو صبوح دوصد کیسه زرگشاد