Омад нафаси субҳ ва саломат нарасонид

آمد نفس صبح و سلامت نرسانید

Буи ту наёвард ва паёмат нарасонид

بوی تو بیاورد و پیامت نرسانید

ё ту ба дами субҳи саломии нспрдӣ

یا تو به دم صبح سلامی نسپردی

ё субҳи дам аз рашк саломат нарасонид

یا صبح‌دم از رشک سلامت نرسانید

Ман нома навиштам ба кабӯтари бспрдм

من نامه نوشتم به کبوتر بسپردم

Чаҳ суд ки бахтами сӯй бомат нарасонид

چه سود که بختم سوی بامت نرسانید

Бод омаду бигусасти ҳаворо зираи абр

باد آمد و بگسست هوا را زِرهِ ابر

Буии зираи ғолия фомат нарасонид

بوی زِرهِ غالیه فامت نرسانید

Бар боди супурдами дилу ҷон то ба ту орад

بر باد سپردم دل و جان تا به تو آرد

Зин ҳар ду надонам ки кадомат нарасонид

زین هر دو ندانم که کدامت نرسانید

Умрӣаст ки чун хоки ҷигари ташнаи ишқам

عمری است که چون خاک جگر تشنهٔ عشقم

Ва айём ба ман ҷуръа ҷомат нарасонид

و ایام به من جرعهٔ جامت نرسانید

Мурғӣаст дилами турфа ки бар дом ту зад ишқ

مرغی است دلم طرفه که بر دام تو زد عشق

Худ ишқи чунин мурғ ба домат нарасонид

خود عشق چنین مرغ به دامت نرسانید

Хоқонии азин толеъи худ ком чаҳ ҷўӣӣ

خاقانی ازین طالع خود کام چه جوئی

Кӯи чошнии ком ба комат нарасонид

کو چاشنی کام به کامت نرسانید

Ноёфтан коми дилати ком дил туаст

نایافتن کام دلت کام دل توست

Пас шукр кун аз ишқ ки комат нарасонид

پس شکر کن از عشق که کامت نرسانید

Хониш
ғзл шморҳ 181 — зҳро бҳмнӣ
ғзл шморҳ 181 — мстфӣ ҳсӣнӣ квмлҳ