Дил бишуд аз дасти дӯстро ба чаҳ ҷӯям
دل بشد از دست دوست را به چه جویم
Нутқ фурӯбаст , ҳоли дил ба чаҳ гӯям
نطق فروبست، حال دل به چه گویم
Нест касами ғамгусор , хуш ба ки бошам
نیست کسم غمگسار، خوش به که باشم
Ҳаст ғамам бе канори лаҳв чаҳ ҷӯям
هست غمم بیکنار لهو چه جویم
Чун ба дар ихтиёр нест марои бор
چون به در اختیار نیست مرا بار
Гирди сарои пардаи мурод чаҳ пўим
گرد سراپردهٔ مراد چه پویم
Захми балоро чу къбтини ҳамаи чашмам
زخم بلا را چو کعبتین همه چشمم
Занги ъноро чу оина ҳама рӯем
زنگ عنا را چو آینه همه رویم
Аз дар ман офият чигуна даройад
از درِ من عافیت چگونه درآید
Чун нашавад пои меҳнат аз сар кӯем
چون نشود پای محنت از سر کویم
Бас ки шудам кӯфта дар оташи андӯҳ
بس که شدم کوفته در آتش اندوه
Гўӣии мардуми ним ки оҳан ва рӯем
گوئی مردم نیَم که آهن و رویم
Тира шуд обами зи баси диранг дар ин хок
تیره شد آبم ز بس درنگ در این خاک
Коши аҷали санг бар задӣ ба сабуем
کاش اجل سنگ برزدی به سبویم
Бахти зи ман дасти шаст шояд агар ман
بخت ز من دست شُست شاید اگر من
Нақши умед аз рух мурод башуем
نقش امید از رخ مراد بشویم
Чун дили худро ба ғам сипорам азин рӯй
چون دل خود را به غم سپارم ازین روی
Душман хоқонем магар ки на ӯем
دشمن خاقانیم مگر که نه اویم