Субҳ каз чашми фалаки ашки сурайё май рехт
صبح کز چشم فلک اشک ثریا میریخت
Меҳри дили оби рухами зи оташи савдо май рехт
مهر دل آب رخم ز آتش سودا میریخت
Он сеӣ сарви хиромони зи сари зулфи сиёҳ
آن سهیسرو خرامان ز سر زلف سیاه
Дили шӯрида дилон мешуд ва дар по май рехт
دل شوریدهدلان میشد و در پا میریخت
Чини гесуии дўторо чу парешон ме кард
چین گیسوی دوتا را چو پریشان میکرد
Машк дар домани яктоеи воло май рехт
مشک در دامن یکتایی والا میریخت
Шеъри ширини марои моҳ мғнӣ ме хонд
شعر شیرین مرا ماه مُغَنی میخواند
Воби шукр ба лаби лаъли шкрхо май рехт
وآب شِکَّر بهلبِ لعلِ شکرخا میریخت
Дар қадамҳои хаёли ту ба доман ҳар дам
در قدمهای خیال تو بهدامن هر دم
Чашми дарёдили ман лؤлؤи лоло май рехт
چشم دریادل من لؤلؤ لالا میریخت
Қадаҳ аз лаъли ту ҳар лаҳза ҳадисӣ ме ронад
قدح از لعل تو هر لحظه حدیثی میراند
Вази лаби рӯҳи Фзои роҳи мусаффо май рехт
وز لب روحفزا راح مصفّا میریخت
Чун сабои шарҳи гулистон ҷамолат ме дод
چون صبا شرح گلستان جمالت میداد
Аз ҳавои домани гул бар сари саҳро май рехт
از هوا دامن گل بر سر صحرا میریخت
Ашк аз он рӯй з мо рафт ва канорӣ бигирифт
اشک از آنروی ز ما رفت و کناری بگرفت
Коб ӯ дам ба дам аз раҳгузари мо май рехт
کاب او دمبهدم از رهگذر ما میریخت
Мавҷи хӯни дили Фарҳод чу мезад бар кӯҳ
موج خون دل فرهاد چو میزد بر کوه
эй басои лаъл ки дар домани хоро май рехт
ای بسا لعل که در دامن خارا میریخت
Аҷаб ар мамлакат Миср намерафт баравад
عجب ار مملکت مصر نمیرفت برود
Зон ҳамаи сайл ки аз чашми Зулайхо май рехт
زان همه سیل که از چشم زلیخا میریخت
Мардуми дидаи хоҷу чу қадаҳ май паймӯд
مردم دیدهٔ خواجو چو قدح میپیمود
Хӯни дил буд ки дар соғари саҳбо май рехт
خون دل بود که در ساغر صهبا میریخت