Ба базмгоҳи сабӯҳӣ кунун ба маҷлиси хос
به بزمگاه صبوحی کنون به مجلس خاص
Ҳаёти бахш буд ҷом май ба ҳукми хавос
حیاتبخش بُود جام مِی به حکم خواص
зи шавқи маҷлиси мисатони нигар ба базми уфуқ
ز شوق مجلس مستان نگر به بزم افق
Ки Зуҳраи нағма саройасту муштарии раққос
که زهره نغمهسرای است و مشتری رقّاص
Бисӯз миҷмари авд эй муқӣми хилвати инс
بسوز مجمر عود ای مقیم خلوت انس
Бисоз базми сабӯҳ эй надими маҷлиси хос
بساز بزم صبوح ای ندیم مجلس خاص
Бигӯ ки фотиҳаи боби субҳи хезон ро
بگو که فاتحهٔ باب صبحخیزان را
Сипеда дам бидамад ҳрзӣ аз сари ихлос
سپیدهدم بدمد حرزی از سر اخلاص
Ту аз ҷароҳати дилҳои хаста нандешӣ
تو از جراحت دلهای خسته نندیشی
Ки дар замир наёрӣ ки алҷрўҳи қисос
که در ضمیر نیاری که الجروح قصاص
Муҳаббат рӯй ту рӯем наметавонад дид
محبّت روی تو رویم نمیتواند دید
Ки гуфтаанд ки алқоси лои иҳби алқос
که گفتهاند که القاص لا یحبّ القاص
На дар ҷамоли ту муштоқро маҷоли назар
نه در جمال تو مشتاق را مجال نظر
На аз каманди ту ушшоқро умеди халос
نه از کمند تو عشّاق را امید خلاص
зи қайди ишқи ту май хостам ки бигурезам
ز قید عشق تو میخواستم که بگریزم
Гирифт пеши раҳи ашкам ки лотҳини мнос
گرفت پیش ره اشکم که لاتحین مناص
Ғариқи лаҷаи дарёӣ ишқ шуд хоҷу
غریق لجّهٔ دریای عشق شد خواجو
Вале чу дар ба кафи орад чаҳ ғам хӯрд ғаввос
ولی چو دُر به کف آرد چه غم خورد غوّاص