Дар сари зулфи сиёҳи ту чаҳ савдост ки нест
در سر زلف سیاه تو چه سوداست که نیست
Вази ғами ишқи ту дар шаҳр чаҳ ғавғост ки нест
وز غم عشق تو در شهر چه غوغاست که نیست
Гуфтӣ аз лаъли ман имрӯзи таманноӣ ту чист
گفتی از لعل من امروز تمنّای تو چیست
Дар дилам зон лаби ширин чаҳ таманност ки нест
در دلم زان لب شیرین چه تمنّاست که نیست
Биҷуз аз зулфи кажати силсилаи ҷунбони дилам
به جز از زلف کژت سلسلهجنبان دلم
Хами зулфи ту гувоҳ ман шайдост ки нест
خم زلف تو گواه من شیداست که نیست
Пои банди ғами савдои ту мискини дили ман
پایبند غم سودای تو مسکین دل من
Натавон гуфт ки ин талъат зебост ки нест
نتوان گفت که این طلعت زیباست که نیست
Дар чаман нест бболои баландати сарвӣ
در چمن نیست به بالای بلندت سروی
Ростӣ дар қади зебоӣ ту пайдост ки нест
راستی! در قد زیبای تو پیداست که نیست؟
Бо ҷамолат накунам майли тамошои баҳор
با جمالت نکنم میل تماشای بهار
Зонка дар гулшани рӯят чаҳ тамошост ки нест
زان که در گلشن رویت چه تماشاست که نیست
Гар касе гуфт ки чун қади ту шамшодӣ нест
گر کسی گفت که چون قدّ تو شمشادی نیست
Агар он қомат ва болост бигӯ рост ки нест
اگر آن قامت و بالاست بگو راست که نیست
Гуфтӣ аз наргиси раъноӣ миннат ҳаст шикеб
گفتی از نرگس رعنای منت هست شکیب
Шоҳиди ҳоли ман он наргис раъност ки нест
شاهد حال من آن نرگس رعناست که نیست
Аикаҳи хоҷуи зи сари зулф ту шуд сўдоӣӣ
ای که خواجو ز سر زلف تو شد سودائی
Дар сари зулфи сиёҳи ту чаҳ савдост ки нест
در سر زلف سیاه تو چه سوداست که نیست