эй ман здўи чашми ним мастати маст
ای من زدو چشم نیم مستت مست
Вздсти ту рафтаи ақлу дайн аз даст
وزدست تو رفته عقل و دین از دست
Биншин ки насим субҳдам бархест
بنشین که نسیم صبحدم برخاست
Бархез ки навбат саҳар бинишаст
برخیز که نوبت سحر بنشست
Бо рӯй ту равнақи қамар гум шуд
با روی تو رونق قمر گُم شد
Вази лаъли ту қимат шукр бишикаст
وز لعل تو قیمت شکر بشکست
Гўӣӣ дар фитна ва бало багушӯд
گوئی در فتنه و بلا بگشود
Наққоши азал ки нақши рӯяти баст
نقّاش ازل که نقش رویت بست
Бардошти дили шикаста аз ман дил
برداشت دل شکسته از من دل
Вндри сари зулфи дилкашати пайваст
وندر سر زلف دلکشت پیوست
Аз лаъли ту икзмон шикебам нест
از لعل تو یکزمان شکیبم نیست
Бе бодаи куҷо қарор гирад маст
بی باده کجا قرار گیرد مست
Дар ишқи ту зи оби дидаи хоҷу ро
در عشق تو ز آب دیده خواجو را
Охир бар ҳар кас обрўӣӣ ҳаст
آخر بر هر کس آبروئی هست