Маи сипеҳри ҳунари шамси дайни мҳмдшоаҳ
مه سپهر هنر شمس دین محمدشاه
Зулоли машраби дайну ниҳол гулшан дод
زلال مشرب دین و نهال گلشن داد
Дар аввали шаби явми алхмсин дар шавол
در اول شب یوم الخمسین در شوال
Миён хуфтану шоми охири маи мурдод
میان خفتن و شام آخر مه مرداد
Дӯдаи гузаштаи зи умраши зи ҷаври даври фалак
دوده گذشته ز عمرش ز جور دور فلک
Бики ду рӯзаи марази соли ҳашт ва на ҳаштод
بیک دو روزه مرض سال هشت و نه هشتاد
Чу тундбоди аҷал дар расед дар нафасӣ
چو تندباد اجل در رسید در نفسی
Бирафт хирмани ҳмрши бҷмлгии барбод
برفت خرمن همرش بجملگی برباد
Чаҳ рӯз буд ки он рӯзро завол расед
چه روز بود که آن روز را زوال رسید
Чаҳ моҳ буд ки он моҳ дар муҳоқ афтод
چه ماه بود که آن ماه در محاق افتاد
Ҳануз гулшанаш аз шҳпри ғроби эмин
هنوز گلشنش از شهپر غراب ایمن
Ҳануз сӯсанаш аз барги замирони озод
هنوز سوسنش از برگ ضمیران آزاد
Чу ӯ бухлад аз нишемани хок
چو او بخلد از نشیمن خاک
Ниҳода шуд сари соли ин мақомро бунёд
نهاده شد سر سال این مقام را بنیاد
Бидон умед ки ҳар кас ки дар расад гуяд
بدان امید که هر کس که در رسد گوید
Ки он ҷавони биҳиштии ғариқи раҳмати бод
که آن جوان بهشتی غریق رحمت باد