Дӯшами бшмъ рӯй чу моҳати ниёз буд

دوشم بشمع روی چو ماهت نیاز بود

Ҷонам чу шамъ аз оташи дили дргзор буд

جانم چو شمع از آتش دل درگذار بود

Дар интизори сайди тзрўи висоли ту

در انتظار صید تذرو وصال تو

Чашмами зи шом то бгаҳи субҳи боз буд

چشمم ز شام تا بگه صبح باز بود

Аз ман мапурс ҳоли шаби дирпои ҳиҷр

از من مپرس حال شب دیرپای هجر

Аз баҳри онки қиссаи он шаби дароз буд

از بهر آنک قصّه آن شب دراز بود

Ман дар ниёз будаму асҳоб дар намоз

من در نیاز بودم و اصحاب در نماز

Лекини ниёзи ман ҳамаи айни намоз буд

لیکن نیاز من همه عین نماز بود

наме сохтам чу барбат ва май сӯхтам чу авд

می ساختم چو بربط و می سوختم چو عود

Зеро ки чора ӣ дили ман сӯзу соз буд

زیرا که چاره ی دل من سوز و ساز بود

Тарки мурод чун з камол муҳаббатаст

ترک مراد چون ز کمال محبّتست

Ҷамро гумон мабар ки бхотми ниёз буд

جم را گمان مبر که بخاتم نیاز بود

Пайваста бо хаёли ҳабиб ҳарам нишин

پیوسته با خیال حبیب حرم نشین

Ҷони Увайси булбули бустони роз буд

جان اویس بلبل بستان راز بود

Хоҷуи кадоми салтанат аз малик ҳар ду кун

خواجو کدام سلطنت از ملک هر دو کون

Маҳмӯдро варои висоли Аёз буд

محمود را ورای وصال ایاز بود