Рамазон омад ва шуд кори суроҳе аз даст

رمضان آمد و شد کار صراحی از دست

Бдрстӣ ки дили нозук соғар бишикаст

بدرستی که دل نازک ساغر بشکست

Ман ки ҷузи бода наме буд бадастами нафасӣ

من که جز باده نمی بود بدستم نفسی

Даст гиред ки ҳаст ин нафасами боди бадаст

دست گیرید که هست این نفسم باد بدست

Онк бе маҷлиси мисатони нншстии икдм

آنک بی مجلس مستان ننشستی یکدم

Ин замон омад ва дар маҷлис тзкир нишаст

این زمان آمد و در مجلس تذکیر نشست

Моҳи нав чун зи лаб бом бидидам гуфтам

ماه نو چون ز لب بام بدیدم گفتم

Аидл аз чанбари ин моҳи куҷои хоҳии ҷуст

ایدل از چنبر این ماه کجا خواهی جست

Дар қадаҳ дил натавон басти магари субҳдамӣ

در قدح دل نتوان بست مگر صبحدمی

Ки ту гўӣии рамазони бор сафар хоҳад баст

که تو گوئی رمضان بار سفر خواهد بست

Хӯни соғари бчнини рӯз наме шояд рехт

خون ساغر بچنین روز نمی شاید ریخت

Раги барбати бчнини вақт намебояд хаст

رگ بربط بچنین وقت نمی باید خست

Моҳи рӯзаи сету марои шарбати ҳиҷрони рӯзӣ

ماه روزه ست و مرا شربت هجران روزی

Рӯзи тавбаи сету турои наргиси ҷодӯи сармаст

روز توبه ست و ترا نرگس جادو سرمست

Ҳечкас нест ки бо шаҳна бигӯед ки чаро

هیچکس نیست که با شحنه بگوید که چرا

Кунад абрӯии ту сардории мисатони пайваст

کند ابروی تو سرداری مستان پیوست

Вақти ифтори биҷузи хӯни ҷигари хоҷу ро

وقت افطار بجز خون جگر خواجو را

Ту мапиндор ки дар машраба ҷлобӣ ҳаст

تو مپندار که در مشربه جلّابی هست