Гар дилами рӯзи видоъ аз пай маҳмил ме шуд
گر دلم روز وداع از پی محمل می شد
Ту мапиндор ки он дилбарам аз дил ме шуд
تو مپندار که آن دلبرم از دل می شد
Ҳеҷ манзил нашавад қофила аз оби ҷудо
هیچ منزل نشود قافله از آب جدا
Зонк пеш аз ҳамаи сайлоб бмнзл ме шуд
زانک پیش از همه سیلاب بمنزل می شد
Гуфтам аз маҳмили он ҷони ҷаҳони баргардам
گفتم از محمل آن جان جهان برگردم
Поем аз хӯни дили сӯхта дар гул ме шуд
پایم از خون دل سوخته در گل می شد
Ростӣ ҳар ки дар он сарв хиромон ме дид
راستی هر که در آن سرو خرامان می دید
Ҳамчуи ман фитна бар он шакл ва шмоӣл ме шуд
همچو من فتنه بر آن شکل و شمائل می شد
Сорибони хайма бурун мезад ва инам аҷабаст
ساربان خیمه برون می زد و اینم عجبست
Ки қиёмат нашуд онрўз ки маҳмил ме шуд
که قیامت نشد آنروز که محمل می شد
Қотилам мешуд ва чун хӯни з ҷароҳат ме рафт
قاتلم می شد و چون خون ز جراحت می رفت
Ҷони ман наъраи занон аз пай қотил ме шуд
جان من نعره زنان از پی قاتل می شد
Ҳамчуи бед аз ғами ҳиҷрони дил ман ме ларзид
همچو بید از غم هجران دل من می لرزید
Кони сеӣ сарви хиромон мутамойил ме шуд
کان سهی سرو خرامان متمایل می شد
Панд оқил накунад суд ки дар банди фироқ
پند عاقل نکند سود که در بند فراق
Дил девона надидем ки оқил ме шуд
دل دیوانه ندیدیم که عاقل می شد
Бигузар аз хеш ки бе қатъи масолики хоҷу
بگذر از خویش که بی قطع مسالک خواجو
Ҳеҷ солик нашунидем ки восил ме шуд
هیچ سالک نشنیدیم که واصل می شد