То дил ба васфи он даҳани арз такаллум ме кунад

تا دل به وصف آن دهن عرض تکلّم می‌کند

Аз ғояти девонагии гуҳи гуҳи сухан гум ме кунад

از غایت دیوانگی گه‌گه سخن گم می‌کند

Гар дар ҳақиқати бенгарӣ доне ки айни мардумии сет

گر در حقیقت بنگری دانی که عین مردمی‌ست

Ончии зи шӯйу ҷафои чашмат ба мардум ме кунад

آنچه ز شوی و جفا چشمت به مردم می‌کند

Гул низ ҳамчун ҷом май дар рақс меояд ба сар

گل نیز همچون جام می در رقص می‌آید به سر

Булбул чу дар базми чаман бо худ тараннум ме кунад

بلبل چو در بزم چمن با خود ترنّم می‌کند

Гар зи онкии гули номўхтаҳи сети ойин бе раҳмии зи ту

گر ز آنکه گل ناموخته‌ست آیین بی‌رحمی ز تو

Бар гиряи абр аз чаҳ рӯи ҳрдм табассум ме кунад

بر گریهٔ ابر از چه رو هردم تبسّم می‌کند

Аз фикри шоми зулфи ту рӯзи хаёлӣ тира шуд

از فکر شام زلف تو روز خیالی تیره شد

Вақтаст агар бар ҳол ӯ чашмат тараҳҳум ме кунад

وقت است اگر بر حال او چشمت ترحّم می‌کند