То зулфи ту диламро пои баста бало кард

تا زلف تو دلم را پا بستهٔ بلا کرد

Сарви қадат ба шухии сад фитна дар ҳаво кард

سرو قدت به شوخی صد فتنه در هوا کرد

Рӯзӣ ки ошиқонро тақсим ризқ карданд

روزی که عاشقان را تقسیم رزق کردند

Рухсори зарду ғамро ишқи ту зон мо кард

رخسار زرد و غم را عشق تو زآن ما کرد

Танҳо саг даратро ман нестам дуъогӯ

تنها سگ درت را من نیستم دعاگو

Ҳар ков шайъанд рӯзии дашном ӯ дуо кард

هر کاو شیند روزی دشنام او دعا کرد

Ҳарчанд ронад хуршед аз пеши субҳдам ро

هرچند راند خورشید از پیش صبحدم را

Чун субҳ дошт сидқӣ боз омад ва сафо кард

چون صبح داشت صدقی باز آمد و صفا کرد

Аз дасти ғами хаёлии бегонаи гашт аз хеш

از دست غم خیالی بیگانه گشت از خویش

Ёрб ғам батонро бо мо ки ошно кард ?

یارب غم بتان را با ما که آشنا کرد؟