Мейри маҷлис ки чу лаби бода равшан дорад

میر مجلس که چو لب بادهٔ روشن دارد

Мардумӣ бошад агар дорад ва аз ман дорад

مردمی باشد اگر دارد و از من دارد

Ғамзаи ?ут аз паии дил чанд кунам чашми сиёҳ

غمزه ات از پی دل چند کنم چشم سیاه

Инак инак дили мангар сар бурдан дорад

اینک اینک دل من گر سر بردن دارد

Гирди лаби тӯтии хати ту чаҳ ширини мурғии сет

گِرد لب طوطیِ خطّ تو چه شیرین مرغی ست

Ки шукри рези лабу равза нишеман дорад

که شکر ریز لب و روضه نشیمن دارد

Лаби лаъли ту зи хӯни дили мо сурх шудаи сет

لبِ لعل تو ز خون دل ما سرخ شده ست

эй басои хӯни ғарибон ки ба гардан дорад

ای بسا خون غریبان که به گردن دارد

То ба дарюзаи соҳиби назарии дидаи ман

تا به دریوزهٔ صاحب نظری دیدهٔ من

Соили кӯй ту шуд лаъл ба доман дорад

سایل کوی تو شد لعل به دامن دارد

Гар насузад дилат аз ғуссаи хаёлӣ чун шамъ

گر نسوزد دلت از غصّه خیالی چون شمع

Аз пас марги чароғи ту ки равшан дорад

از پس مرگ چراغ تو که روشن دارد