Умрӣ давидаем ба дунболи аҳли роз

عمری دویده ایم به دنبالِ اهل راز

Ёрб магар ба ёри расми худ ту чораи соз

یارب مگر به یار رسم خود تو چاره ساز

Зоҳид ба роҳи масҷид ва мо кӯй май фуруш

زاهد به راه مسجد و ما کوی می فروش

То кор кӣ баровард он ёр бе ниёз

تا کارِ کی برآورد آن یار بی نیاز

Инкор бар ҳақиқати ошиқ чаҳ ме кунӣ

انکار بر حقیقت عاشق چه می کنی

эй раҳ набарда ҳеҷ магари ҷониби муҷоз

ای ره نبرده هیچ مگر جانب مجاز

Парҳез кун зи нолаи ҷонсӯз бе дилон

پرهیز کن ز نالهٔ جانسوز بی دلان

Гар огаҳии зи оташи ин оҳи ҷонгдоз

گر آگهی ز آتش این آهِ جانگداز

Бо ҷаври ёр ба ки бисозӣ дар ин ду рӯз

با جور یار به که بسازی در این دو روز

То кӣ кунӣ ба шикваи хаёлии забони дароз

تا کی کنی به شِکوِه خیالی زبان دراز