Ман он ним ки гузорами зи дасти домани ту
من آن نیَم که گذارم ز دست دامن تو
Тугар зи тавқи вафои саркашӣ ба гардани ту
تو گر ز طوق وفا سرکشی به گردن تو
Гузор то ба кафи ореми домани зулфат
گذار تا به کف آریم دامن زلفت
Вагарнаи рӯзи ҷазои дасти моу домани ту
وگرنه روز جزا دست ما و دامن تو
Чу шамъи субҳи дам аз нури зан ки бас бошад
چو شمعِ صبح دم از نور زن که بس باشد
Сафои чеҳраи далели замири равшани ту
صفای چهره دلیل ضمیر روشن تو
Шабӣ ки маҷлиси хилвати сафои диҳӣ , ма ро
شبی که مجلس خلوت صفا دهی، مه را
намерасад ки сар андар занад ба равзани ту
نمی رسد که سر اندر زند به روزن تو
Мақоми қурби ҳамин бас буд хаёлӣ ро
مقام قرب همین بس بود خیالی را
Ки хонаи дил мискин ӯст маскани ту
که خانهٔ دل مسکین اوست مسکن تو