Кноитҳо ба об Хизр гуфта
کنایت ها به آب خضر گفته
Даҳонаш пеши лаб аммо наҳуфта
دهانش پیش لب امّا نهفته
Магари гулзори рухсори ту рангии сет
مگر گلزار رخسار تو رنگی ست
Казин сони сурхии рӯяти шукуфта
کزین سان سرخی رویت شکفته
Чаҳ миҳробии сети тоқи абрувонат
چه محرابی ست طاق ابروانت
Ки дар ҳар гӯшааш мастии сети хуфта
که در هر گوشه اش مستی ست خفته
Саборо остони рӯбии мФрмоӣ
صبا را آستان روبی مفرمای
Ба мижгон бояд он даргоҳи рафта
به مژگان باید آن درگاه رُفته
Хаёлӣ дар сухан дар сифт ва он шӯх
خیالی در سخن دُر سفت و آن شوخ
намегирад ба гӯши дарҳои суфта
نمی گیرد به گوش دُرهای سفته