Зулфи каманди афканати иқлӣм ҷон гирифт
زلف کمند افکنت اقلیم جان گرفت
Бо ин каманд рӯй замин метавон гирифт
با این کمند روی زمین می توان گرفت
Таркон чаҳ сон ба ниғ бигиранда малик ро
ترکان چه سان به نیغ بگیرنده ملک را
Чашмат ба ғамзаи малики дили мо чунон гирифт
چشمت به غمزه ملک دل ما چنان گرفت
Хубони ҳамаи з шарм гирифтанд рӯй хеш
خوبان همه ز شرم گرفتند روی خویش
Пеши нав аз нахуст ба осмон гирифт
پیش نو از نخست به آسمان گرفت
эй дил матарс аз онкӣ нагардӣ шикори ёр
ای دل مترس از آنکه نگردی شکار یار
Инак з ғамза напар вази абрӯ гумон гирифт
اینک ز غمزه نپر وز ابرو گمان گرفت
Сари пеш ӯ ниҳодам ва нагирифт он ба ҳеҷ
سر پیش او نهادم و نگرفت آن به هیچ
Ҷони азиз чун биниҳодам равон гирифт
جان عزیز چون بنهادم روان گرفت
Аз лоғарӣ гирифт ба як так шабами рақиб
از لاغری گرفت به یک تک شبم رقیب
Хандид бор ва гуфт ки саг устихон гирифт
خندید بار و گفت که سگ استخوان گرفت
Дар боб ошиқӣаст ҳадисӣ ба зари камол
در باب عاشقی است حدیثی به زر کمال
Ҳар нақш каз рухи нав бар он остон гирифт
هر نقش کز رخ نو بر آن آستان گرفت