Ҳаргиз ба дарди дӯсти дили мо з ҷо нарафт

هرگز به درد دوست دل ما ز جا نرفت

Ранҷури ишқ ӯ сӯй дорушшифо нарафт

رنجور عشق او سوی دارالشفا نرفت

Бемори чашму хастаи он ғамза бар забон

بیمار چشم و خسته آن غمزه بر زبان

Номи сФои табарад ва ба фикр даво нарафт

نام ثفا تبرد و به فکر دوا نرفت

Бар ҷони зи ғмзҳои нав беш аз ҳазор тир

بر جان ز غمزهای نو بیش از هزار تیر

Ояд сад офарин ки хадангӣ хато нарафт

آید صد آفرین که خدنگی خطا نرفت

Дар сайдгоҳи чашми ту аз ҳалқаҳои зулф

در صیدگاه چشم تو از حلقه های زلف

Мурғӣ надидаам ки ба дом бало нарафт

مرغی ندیده ام که به دام بلا نرفت

Аз соликони роҳи нав кӣ ӣӣ сиришку оҳ

از سالکان راه نو کی یی سرشک و آه

Ниҳоди по бар об ва ба рӯй ҳаво нарафт

نهاد پا بر آب و به روی هوا نرفت

Онро ки пой буд надоди ин талаби зи даст

آنرا که پای بود نداد این طلب ز دست

Вонксӣ ки чашм дошт дар ин роҳ ба по нарафт

وآنکسی که چشم داشت در این راه به پا نرفت

Зини остони набарди паноҳӣ ба кӣ камол

زین آستان نبرد پناهی به کی کمال

Дарвеши кӯии ту ба дар подшо нарафт

درویش کوی تو به در پادشا نرفت