эй сабо чанд рӯй бар ди ҷонони густох
ای صبا چند روی بر د جانان گستاخ
Дар шаби тор бар он зулфи парешони густох
در شب تار بر آن زلف پریشان گستاخ
Бошад инҳо ҳаракоти хунаку бодисирӣ
باشد اینها حرکات خنک و بادسری
Ки дар он равза кунӣ гашти шҳстони густох
که در آن روضه کنی گشت شهستان گستاخ
Зулфи каҷдор ки бо рӯй нав паҳлу назанад
زلف کجدار که با روی نو پهلو نزند
Ҳндўонро натавон кард ба таркони густох
هندوانرا نتوان کرد به ترکان گستاخ
Гар барам номи лабати гиряи кунони хурдаи мгир
گر برم نام لبت گریه کنان خرده مگیر
Ин ки худами сохта бар лаби хандони густох
این که خودم ساخته بر لب خندان گستاخ
Лавҳи рухсори ту бпишши ҳамаи вақт ин аҷабаст
لوح رخسار تو بپیشش همه وقت این عجبست
Ки бар омад хати мишкӣни ту зинсони густох
که بر آمد خط مشکین تو زینسان گستاخ
Порсоёни адаб ринд надоранд нигоҳ
پارسایان ادب رند ندارند نگاه
Дидаам бештари мардуми нодони густох
دیده ام بیشتر مردم نادان گستاخ
Боғи рухсор батон баҳр тамошост камол
باغ رخسار بتان بهر تماشاست کمال
Табарии дасти барони себи занхдони густох
تبری دست برآن سیب زنخدان گستاخ