Бози тири ғамза ӯ бар дили мо кӣ расад
باز تیر غمزه او بر دل ما کی رسد
Ин назар то бар кӣ уфтад ин бало то кӣ расад
این نظر تا بر کی افتد این بلا تا کی رسد
Доварӣ ҷонҳо наҳо он абрувон бар тоқҳо
داوری جانها نها آن ابروان بر طاقها
Дасти кӯтоҳи ман маҳрӯми онҷо кӣ расад
دست کوتاه من محروم آنجا کی رسد
Кардаанд он лаби тамаъи шоҳон на танҳо чокарон
کرده اند آن لب طمع شاهان نه تنها چاکران
Чун гадо бисёр шуд моро зи ҳалво кӣ расад
چون گدا بسیار شد ما را ز حلوا کی رسد
Зарраро сад пора бояд кард вақти поибўс
ذره را صد پاره باید کرد وقت پایبوس
Чун гадо бисёр шуд бо мо зарраи зарраи хоки он по кӣ расад
چون گدا بسیار شد با ما ذره ذره خاک آن پا کی رسد
Кӣ расад гуфтам ба болои ту чашм аз зери пой
کی رسد گفتم به بالای تو چشم از زیر پای
Гуфт он обӣаст аз пастӣу боло кӣ расад
گفت آن آبی است از پستی و بالا کی رسد
Аз лабаш дашном мехоҳӣ талаб дар ҳар дуо
از لبش دشنام میخواهی طلب در هر دعا
Бо гадои марсуми султон бетақозо кӣ расад
با گدا مرسوم سلطان بی تقاضا کی رسد
Он зқн бе сӯзи сина кӣ бадаст ояд камол
آن ذقن بی سوز سینه کی بدست آید کمال
Себ ширинаст ва бе осеби гармо кӣ расад
سیب شیرین است و بی آسیب گرما کی رسد