Дили ман бе ту дигар дидаи бино чаҳ кунад
دل من بی تو دگر دیده بینا چه کند
Дида бе манзари хуби ту тамошо чаҳ кунад
دیده بی منظر خوب تو تماشا چه کند
Зон лабам май надиҳади дил ки назар бар гирам
زان لبم می ندهد دل که نظر بر گیرم
Чашм сӯфӣ нашавад сайри зи ҳалво чаҳ кунад
چشم صوفی نشود سیر ز حلوا چه کند
Доғу дардӣ ки расад аз ту марои ҳақ дил аст
داغ و دردی که رسد از تو مرا حق دل است
Дили ҳақ худ накунад аз ту тақозо чаҳ кунад
دل حق خود نکند از تو تقاضا چه کند
Ошиқ аз шавқи ҷамоли ту чу гули ҷомаи ҷон
عاشق از شوق جمال تو چو گل جامه جان
Ҳолиё кард бсди пора дигар то чаҳ кунад
حالیا کرد بصد پاره دگر تا چه کند
Порсо аз вараъу зуҳди қабул ту наёфт
پارسا از ورع و زهد قبول تو نیافت
То аноят набӯд фоидаи инҳо чаҳ кунад
تا عنایت نبود فایده اینها چه کند
Ёр беҷурм гирифтам ҳамаро кишти имрӯз
یار بی جرم گرفتم همه را کشت امروز
Ҳеҷ бо худ накунад фикр ки фардо чаҳ кунад
هیچ با خود نکند فکر که فردا چه کند
Карда аз ҳар тарафии дарду блоқсди камол
کرده از هر طرفی درد و بلاقصد کمال
Дар миёни ҳамаи мискини тан танҳо чаҳ кунад
در میان همه مسکین تن تنها چه کند