Дӯшами хаёл рӯй ту дар сари фитода буд
دوشم خیال روی تو در سر فتاده بود
Гӯшӣ дар биҳишт биравем кушода буд
گوشی در بهشت برویم گشاده بود
То ту з дар даронӣу маҷлиси диҳии фурӯғ
تا تو ز در درآنی و مجلس دهی فروغ
Шаби нои бурузи шамъ ба пои истода буд
شب نا بروز شمع به پا ایستاده بود
Соқӣ ба ёд рӯй туам ҳар қадаҳ ки дод
ساقی به یاد روی توام هر قدح که داد
Оби ҳаёт буд ки хӯрдам на бода буд
آب حیات بود که خوردم نه باده بود
Ҷом аз лаби ту хости гузаштан ба ноз кӣ
جام از لب تو خواست گذشتن به ناز کی
Он софи дили байн ки чаҳ миқдори сода буд
آن صاف دل بین که چه مقدار ساده بود
Дар хоб дидамат ки бмни даст май диҳӣ
در خواب دیدمت که بمن دست می دهی
Давлати нигар ки дӯши маро даст дода буд
دولت نگر که دوش مرا دست داده بود
Саргашта ки буд равони пеши ту чу шамъ
سرگشته که بود روان پیش تو چو شمع
Ҷонӣ бадаст карда ва бар кафи ниҳода буд
جانی بدست کرده و بر کف نهاده بود
Дард арча кам набӯд з ҳар сӯи камол ро
درد ارچه کم نبود ز هر سو کمال را
Дӯш аз фироқ рӯй ту чизеи зиёда буд
دوش از فراق روی تو چیزی زیاده بود