Дӯшинаи хаёлати ҳамаи шаби мӯниси мо буд

دوشینه خیالت همه شب مونس ما بود

То рӯзи ду дасти ман ва он зулфи дўто буд

تا روز دو دست من و آن زلف دوتا بود

Маҷлиси хушу дили ҷамъу мураттаби ҳамаи асбоб

مجلس خوش و دل جمع و مرتب همه اسباب

Азъиш ба ёди ту чгўим ки чҳо буд т

ازعیش به یاد تو چگویم که چها بود ت

Дар кулбаи мо меҳнат ҳар рӯзаи шаби дӯш

در کلبه ما محنت هر روزه شب دوش

Шариф нафармуд надонам ки куҷо буд

شریف نفرمود ندانم که کجا بود

Ман дар аҷаби он лаҳзаи зи ташрифи хаёлат

من در عجب آن لحظه ز تشریف خیالت

Кони поя на дар хӯрд ман бе сарви по буд

کان پایه نه در خورد من بی سرو پا بود

Гар икдмаҳи васл ту харидем баъди ҷон

گر یکدمه وصل تو خریدیم بعد جان

Он ҳам сари як мӯии турои ним баҳо буд

آن هم سر یک موی ترا نیم بها بود

Андешаи хӯни рехтанами дӯш ба он чашм

اندیشه خون ریختنم دوش به آن چشم

Бар азм ҷафо кардӣ ва он айни вафо буд

بر عزم جفا کردی و آن عین وفا بود

Гар дошт камол аз нави ниҳони сӯзи ту чун шамъ

گر داشت کمال از نو نهان سوز تو چون شمع

Бар сӯзи нҳоӣиши рухи зарди гўо буд

بر سوز نهائیش رخ زرد گوا بود