Нури чашмии ту моро назарӣ май бояд
نور چشمی تو ما را نظری میباید
Гар расад сад назар аз ту дгарӣ май бояд
گر رسد صد نظر از تو دگری میباید
Боз бинмо рухи зё чу буридӣ сари зулф
باز بنما رخ زیا چو بریدی سر زلف
Мунқатиъ шуд шаби пурҳи саҳарӣ май бояд
منقطع شد شب پره سحری میباید
Ба ибодати сухании гӯй ки ранҷурон ро
به عبادت سخنی گوی که رنجوران را
Аз шифохонаи он лаби шукрӣ май бояд
از شفاخانه آن لب شکری میباید
Тўтёро натавонам ки бубинам ба ду чашм
توتیا را نتوانم که ببینم به دو چشم
Серумаи чашми ман аз хоки дарӣ май бояд
سرمه چشم من از خاک دری میباید
Дил ушшоқ гирифтӣ ба сар зулф сипор
دل عشاق گرفتی به سر زلف سپار
То ба ҳам бар наравад малики сиррӣ май бояд
تا به هم بر نرود ملک سری میباید
Ба кабӯтар чаҳ фиристам ки баради номаи шавқ
به کبوتر چه فرستم که برد نامه شوق
Ки марои сӯии ту болу парӣ май бояд
که مرا سوی تو بال و پری میباید
Чаҳ матоъии сети суханҳои диловези камол
چه متاعیست سخنهای دلاویز کمال
Лоиқи гӯши ту ба зини гуҳарӣ май бояд
لایق گوش تو به زین گهری میباید