Омад даруни дили ғамат дигар намеояд бурун
آمد درون دل غمت دیگر نمی آید برون
Савдои он зулфи сияҳ аз сар намеояд бурун
سودای آن زلف سیه از سر نمی آید برون
Шавқи биҳишту ҳури айни савдои ону фикри ин
شوق بهشت و حور عین سودای آن و فکر این
Аз дила бурун омад ҳама дилбар намеояд бурун
از دله برون آمد همه دلبر نمی آید برون
То рух напӯшӣ кӣ шавад аз дидаи ашки мо равон
تا رخ نپوشی کی شود از دیده اشک ما روان
Пинҳон нагашта офтоб ахтар намеояд бурун
پنهان نگشته آفتاب اختر نمی آید برون
Наққоши чин ҳар сӯратии конгихт дар бтхонаҳ ҳо
نقاش چین هر صورتی کانگیخت در بتخانه ها
Ҳаргизи зи шарм рӯй ӯ аз дар намеояд бурун
هرگز ز شرم روی او از در نمی آید برون
То дил нарафтем аз ҳамаи нақшати дарав пайдо нашуд
تا دل نرفتیم از همه نقشت درو پیدا نشد
Ойинаро бесайқалӣ ҷавҳар намеояд бурун
آئینه را بی صیقلی جوهر نمی آید برون
Гуфтӣ буруни ой аз дирам биншин ба хоки остон
گفتی برون آی از درم بنشین به خاک آستان
Шаҳ ҳар чаҳ гуяд зони сухан чокар намеояд бурун
شه هر چه گوید زآن سخن چاکر نمی آید برون
То тутароне кӣ раванд аз кӯии ту дилҳои мо
تا تو ترانی کی روند از کوی تو دلهای ما
Нои рондаи ҳукмии подшо лашкар намеояд бурун
نا رانده حکمی پادشا لشکر نمی آید برون
Аз ғамзаи чашми хўӣити брриш дил зад нштрӣ
از غمزه چشم خوئیت برریش دل زد نشتری
Хӯнҳо бурун омад вале нашутур намеояд бурун
خونها برون آمد ولی نشتر نمی آید برون
Чашми камол аз талхии ҳиҷр ту шуд гавҳар фишон
چشم کمال از تلخی هجر تو شد گوهر فشان
Беталхӣ аз баҳрҳо гавҳар намеояд бурун
بی تلخی از بحرها گوهر نمی آید برون