зи ҳиҷр сӯхта шуд ҷони ман сапанди ту бод

ز هجر سوخته شد جان من سپند تو باد

Дилам ҳамеша асири хами каманди ту бод

دلم همیشه اسیر خم کمند تو باد

Дареғ бошад ҷавлони ту суннат бар хок

دریغ باشد جولان تو سنت بر خاک

Саводи дидаи бисоти сами саманди ту бод

سواد دیده بساط سم سمند تو باد

Чу ҳиндӯон ки ба сӯии дарахт саҷда баранд

چو هندوان که به سوی درخت سجده برند

Намози ман ба сӯии қомати баланди ту бод

نماز من به سوی قامت بلند تو باد

Ҷароҳати ту ки бидрди завқ ман бишнохт

جراحت تو که بیدرد ذوق من بشناخت

Давои синаи ушшоқи дардманди ту бод

دوای سینه عشاق دردمند تو باد

Агар чаҳ ман ба рахти ҳамчуи чашми брдўзм

اگر چه من به رخت همچو چشم بردوزم

Ҳазор ҳамчуи манӣ сӯхтаи сапанди ту бод

هزار همچو منی سوخته سپند تو باد

Дилам ки хон халилаш ба чашми дрноид

دلم که خوان خلیلش به چشم درناید

Туфайлии магасони лаб чу қанди ту бод

طفیلی مگسان لب چو قند تو باد

Гуҳ аз гуҳии сухани талхи айши хусрав ро

گه از گهی سخن تلخ عیش خسرو را

Гузашта бар лаби ширин нӯш ханд ту бод

گذشته بر لب شیرین نوش خند تو باد