Кадоми дил ки ту ғмздаҳ задӣ фигор нашуд ?
کدام دل که تو غمزده زدی فگار نشد؟
Кадоми кас ки туро дид ва беқарор нашуд ?
کدام کس که ترا دید و بی قرار نشد؟
Ҳароми боди зхоки ту бар дар ҳар чашм
حرام باد زخاک تو بر در هر چشم
Ки ҳеҷ баҳраи ин чашм хоксор нашуд
که هیچ بهره این چشم خاکسار نشد
Бсухт нолаи ман сангро , аҷаб санг аст
بسوخت ناله من سنگ را، عجب سنگ است
Дилат ки сӯхтаи зини нолаҳои зор нашуд
دلت که سوخته زین ناله های زار نشد
Назора мекунам аз давр , мехӯрам ҷгарӣ
نظاره می کنم از دور، می خورم جگری
Ки ҷуз ба доманами ин нақл хушгувор нашуд
که جز به دامنم این نقل خوشگوار نشد
Ҷаҳони пар аз гулу сарви равонам аз ман давр
جهان پر از گل و سرو روانم از من دور
Ҳисоби ман ба ҷаҳони гўиё баҳор нашуд
حساب من به جهان گوییا بهار نشد
Хушо киришмаи он ёр , дӯши зории ман
خوشا کرشمه آن یار، دوش زاری من
Ба дида бршкн дод ва шармсор нашуд
به دیده برشکن داد و شرمسار نشد
Матоъи васл на андари қиёси ҳиммати мост
متاع وصل نه اندر قیاس همت ماست
Ки мурғи сидраи ғлиўожро шикор нашуд
که مرغ سدره غلیواژ را شکار نشد
Ба ишқи дӯзахии хом сӯз шуд хусрав
به عشق دوزخی خام سوز شد خسرو
Азон ки сӯхти дарин кори пухта кор нашуд
ازان که سوخت درین کار پخته کار نشد