Имрӯз ки аз борон шуд сабзаи раъно тар

امروز که از باران شد سبزه رعنا تر

Симу зари гули ҷумлаи гаштанд ба саҳро тар

سیم و زر گل جمله گشتند به صحرا تر

Аҳволи ду чашми ман дар гиря яке бингар

احوال دو چشم من در گریه یکی بنگر

Чун хонаи пари равзани ӣнҷотар ва онҷотар

چون خانه پر روزن اینجاتر و آنجاتر

Сад ҷон на яке бояд то сарф кунам дар раҳ

صد جان نه یکی باید تا صرف کنم در ره

Гардад чу кафи поят дар роҳи тамошотар

گردد چو کف پایت در راه تماشاتر

Оҳанги буруни дорӣ , обаст ба раҳ , эй чашм

آهنگ برون داری، آب است به ره، ای چشم

Зини роҳ тафаҳҳус кун хушкаст замин ё тар

زین راه تفحص کن خشک است زمین یا تر

Дар сабза хиромидан кардӣ ҳавас ва шустан

در سبزه خرامیدن کردی هوس و شستن

Худ сабза нахоҳад буд аз хати ту раънотар

خود سبزه نخواهد بود از خط تو رعناتر

Болотар ҳар ҷои ду чашми ту ҳамеи байнам

بالاتر هر جا دو چشم تو همی بینم

Абрӯии ту май байнам аз чашми ту болотар

ابروی تو می بینم از چشم تو بالاتر

Хусрав , сифати хубон май гӯй ки худ набӯд

خسرو، صفت خوبان می گوی که خود نبود

Дар ҳеҷ гулистонии булбули зи ту гуётар

در هیچ گلستانی بلبل ز تو گویاتر