Куҷо буд ман мадҳушро ҳузури намоз !
کجا بود من مدهوش را حضور نماز!
Ки кунҷи каъбаи зи дайр Муғон надонам боз
که کنج کعبه ز دیر مغان ندانم باز
Маро махон ба намоз , эй эмом ва ваъз магӯӣ
مرا مخوان به نماز،ای امام و وعظ مگوی
Ки аз ниёз намебошудам ҳузури намоз
که از نیاز نمی باشدم حضور نماز
Чу сӯфӣ аз месофӣ намекунад парҳез
چو صوفی از می صافی نمی کند پرهیز
Мабош мункири дардии кашони шоҳиди боз
مباش منکر دردی کشان شاهد باز
Басони мтрФ муфлис навой сӯхтагон
بسان مطرف مفلس نوای سوختگان
Чу булбул саҳарӣ мекунад самоъи оғоз
چو بلبل سحری می کند سماع آغاز
Агар чаҳ авди туам , ҳар нафас бихоҳӣ сӯхт
اگر چه عود توام، هر نفس بخواهی سوخت
Марои зи соз чаҳ май аФгнӣ ? бисӯз ва бисоз
مرا ز ساز چه می افگنی؟ بسوز و بساز
Бидон тамаъ ки кунад мурғи васли хубони сайд
بدان طمع که کند مرغ وصل خوبان صید
Ду дидаам шуда аз шом то саҳаргаҳи боз
دو دیده ام شده از شام تا سحرگه باز
Хаёли зулфи дарози ту гар нагирад даст
خیال زلف دراز تو گر نگیرد دست
Ки барсари оради азин зулматами шубони дароз
که برسر آرد ازین ظلمتم شبان دراز
Ту дар тнъму нозӣ , зи мо кӣ андешӣ ?
تو در تنعم و نازی، ز ما کی اندیشی؟
Ки нози мо ба ниёзасту нозаши ту ба ноз
که ناز ما به نیاز است و نازش تو به ناز
Агар зи хати ту чун мӯии сари бгрдонм
اگر ز خط تو چون موی سر بگردانم
Бабанд ва чун сари зулфам бар офтоб андоз
ببند و چون سر زلفم بر آفتاب انداز
Умеди бандаи мискин ба ҳеҷ восиқ нест
امید بنده مسکین به هیچ واثق نیست
Магар ба лутфи худовандгори бандаи навоз
مگر به لطف خداوندگار بنده نواز
Гузашти шеъри зи шеърӣу шӯриш аз гардун
گذشت شعر ز شعری و شورش از گردون
Чаро ки аз пай овоза меравад овоз
چرا که از پی آوازه می رود آواز
Хиради мҷўии зи хусрав ки аҳли маънӣ ро
خرد مجوی ز خسرو که اهل معنی را
Назар ба ишқи ҳақиқат , буд на ақли муҷоз
نظر به عشق حقیقت، بود نه عقل مجاز