Агар ба гӯша нишинон намояди он рухи хуб

اگر به گوشه نشینان نماید آن رخ خوب

Ба ғамзаи дил бар бояд зи солики маҷзӯб

به غمزه دل بر باید ز سالک مجذوب

Балои мардуми аҳли назар буд чашмат

بلای مردم اهل نظر بود چشمت

Ба ноз агар ба дар оеи зи мактаб , эй маҳбӯб

به ناز اگر به در آیی ز مکتب، ای محبوب

Даҳон ёр наёяд рақибро дар чашм

دهان یار نیاید رقیب را در چشم

Ки хурда байн набӯд ҳеҷ дидаи маъюб

که خرده بین نبود هیچ دیده معیوب

Фироқ рӯй чу ту Юсуфӣ касе донад

فراق روی چو تو یوسفی کسی داند

Ки равшанаш шавад оби ду дидаи ёқӯб

که روشنش شود آب دو دیده یعقوب

Чу номаи ту гушойам шавад пари обами чашм

چو نامه تو گشایم شود پر آبم چشم

Ба ҳеҷ рӯ натавонам ки хонам он мактуб

به هیچ رو نتوانم که خوانم آن مکتوب

Маранҷ агар набӯд дар хурати кабоби дилам

مرنج اگر نبود در خورت کباب دلم

Ту миҳмони азизӣ ва ҳаст ин марғӯб

تو میهمان عزیزی و هست این مرغوب

Кашад барои ту хусрави ҷафои муддаӣон

کشد برای تو خسرو جفای مدعیان

Ки баҳри дӯсти зи Кирмон ҷафо кашад Айюб

که بهر دوست ز کرمان جفا کشد ایوب