Зиҳии зулфати шикастаи нархи сунбул

زهی زلفت شکسته نرخ سنبل

Гулистони рахти хандида бар гул

گلستان رخت خندیده بر گل

Рисондаи хати ёқӯти ту райҳон

رسانده خط یاقوت تو ریحان

Кашида хат ба кофури ту сунбул

کشیده خط به کافور تو سنبل

Арӯсиро ки ӯ соҳиб ҷамол аст

عروسی را که او صاحب جمال است

Чу дарёбад , гараш набӯд таҳаммул

چو دریابد، گرش نبود تحمل

Чу риши хастагонро марҳам аз тест

چو ریش خستگان را مرهم از تست

Макун дар кори мискинони тағофул

مکن در کار مسکینان تغافل

Агар гулро набошад баргу пайванд

اگر گل را نباشد برگ و پیوند

Чаҳ суд аз нолаи шабгири булбул ?

چه سود از ناله شبگیر بلبل؟

Ба ҷонати конкаҳ бар ҷон дорам аз ғам

به جانت کانکه بر جان دارم از غم

Набошад кӯҳи сангинро таҳаммул

نباشد کوه سنگین را تحمل

Чу аз зулфаши бад-ӣни рӯзи аўФтодм

چو از زلفش بدین روز اوفتادم

Ту низ , эй шаб , макун бар ман татовул

تو نیز، ای شب، مکن بر من تطاول

Хушо он базми рӯҳонӣ ки ҳар дам

خوشا آن بزم روحانی که هر دم

Кунад мастӣ ба подоши таъаққул

کند مستی به پاداش تعقل

Бизан мутриб ки мисатони сабӯҳӣ

بزن مطرب که مستان صبوحی

Аз он мустанаду хусрав аз тааммул

از آن مستند و خسرو از تامل