Мусулмонон бирафт аз дасти ман дил
مسلمانان برفت از دست من دل
Чу дидам ончунон шаклу шамоил
چو دیدم آنچنان شکل و شمایل
Ҷаҳониро бад-ӣни шаклу шамоил
جهانی را بدین شکل و شمایل
Ҳамеи байнам чу худ имрӯзи моил
همی بینم چو خود امروز مایل
Зиҳии сонеъи худо каз лутфи бнгошт
زهی صانع خدا کز لطف بنگاشت
Аз ин сони сӯратӣ аз об ва аз гул
از این سان صورتی از آب و از گل
Набошад чун ҷамолати маҷлиси афрӯз
نباشد چون جمالت مجلس افروز
Агар хўршсид биншинад ба маҳфил
اگر خورشید بنشیند به محفل
Дилами манзил ба зулфат кард , гӯйӣ
دلم منزل به زلفت کرد، گویی
Нахоҳад рафт азин фархундаи манзил
نخواهد رفت ازین فرخنده منزل
Танам каз хок гардад нақши меҳрат
تنم کز خاک گردد نقش مهرت
зи наъш ҷон нахоҳад гашти зоил
ز نعش جان نخواهد گشت زایل
Маломат мекунанд асҳоби мо ро
ملامت می کنند اصحاب ما را
зи дарди мо магар ҳастанд ғофил
ز درد ما مگر هستند غافل
Надорам тоқати дарди фироқат
ندارم طاقت درد فراقت
Фироқи дӯстони кории сети мушкил
فراق دوستان کاری ست مشکل
Дарин раҳ , хсрўо , девона ме бош
درین ره، خسروا، دیوانه می باش
Наме бояд шунидани панди оқил
نمی باید شنیدن پند عاقل