Тарк ман рафтам зи Кувайтгар зи ман гаштии малул

ترک من رفتم ز کویت گر ز من گشتی ملول

Хайр бодат мекунам як саҷдаи фардои қабул

خیر بادت می‌کنم یک سجده فردا قبول

Зӯр ва зар бошанд асбоби висол , аммо маро

زور و زر باشند اسباب وصال، اما مرا

Нест чизеи ғайри зорӣ дар таманнои вусӯл

نیست چیزی غیر زاری در تمنای وصول

Бас ки чашмами сайли хӯн май борад аз ҳиҷрони ту

بس که چشمم سیل خون می‌بارد از هجران تو

Корвон дар раҳ намеёбад зи гули ҷои нузул

کاروان در ره نمی‌یابد ز گل جای نزول

Дам ба дам аз хӯни дил бо ту нивисам нома , лек

دم‌به‌دم از خون دل با تو نویسم نامه، لیک

Ҷузи насими субҳдам дигар намеёбам расӯл

جز نسیم صبحدم دیگر نمی‌یابم رسول

Дар ҳарими каъбаи рӯҳонӣон , яъне ки дил

در حریم کعبه روحانیان، یعنی که دل

Ҷузи хаёли дӯсти касро нест имкони нузул

جز خیال دوست کس را نیست امکان نزول

То бихонад ояти ишқ аз хати мишкӣни бор

تا بخواند آیت عشق از خط مشکین بار

Рафт аз ёдами ривоёти фурӯғ бе усӯл

رفت از یادم روایات فروغ بی‌اصول

Оқилон гар ғофиланд аз ҳоли хусрав , айб нест

عاقلان گر غافلند از حال خسرو، عیب نیست

Аз мҷонин кӣ хабар доранд арбоби уқул ?

از مجانین کی خبر دارند ارباب عقول؟