зи ҳиҷрони рӯзи ман шаби гашт ва кӣ будӣ чунин рӯзам
ز هجران روز من شب گشت و کی بودی چنین روزم
Шабигар рӯз кардӣ бо ман он моҳи шаби афрӯзам
شبی گر روز کردی با من آن ماه شب افروزم
Гирифтори омадам ҷое ва наҳамоно раҳам зеро
گرفتار آمدم جایی و نهمانا رهم زیرا
Шикасти он қалби кӯ бар хайл ғам мекард пирӯзам
شکست آن قلب کو بر خیل غم می کرد پیروزم
Барояд зини ҳаваси ҷонам ки як шаби шамъ ту бошам
برآید زین هوس جانم که یک شب شمع تو باشم
Ту хуши хуши бода май нӯшии вмн чун шамъ май сӯзам
تو خوش خوش باده می نوشی ومن چون شمع می سوزم
Балоу ғам харидор омаданд аз сӯии ту бар ман
بلا و غم خریدار آمدند از سوی تو بر من
Биҳамдиллоҳ ки дар кӯии ту бозораст имрӯзам
بحمدالله که در کوی تو بازار است امروزم
Касе аз умри худ рӯзӣ нахоҳад кам , вале бар ман
کسی از عمر خود روزی نخواهد کم، ولی بر من
Равадгар бе ғамати рӯзӣ , мабодои рӯзии он рӯзам
رود گر بی غمت روزی، مبادا روزی آن روزم
Кашам то ҷон буд дар тан , ҷафоҳои саги Кувайт
کشم تا جان بود در تن، جفاهای سگ کویت
Саги кӯии турои борӣу Фодории биомузам
سگ کوی ترا باری و فاداری بیاموزم
Ниҳон то чанд дорам дарди хусравро зи ту охир
نهان تا چند دارم درد خسرو را ز تو آخر
Дилами бардаи зи кафи вонгаҳи лаби беҳуда май дузам
دلم برده ز کف وانگه لب بیهوده می دوزم